राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में बढ़ी टेंशन : दिल्ली दरबार ने कसी निगरानी, क्रॉस वोटिंग के खतरे से सतर्क हाईकमान, मप्र के नेताओं को दिया स्पष्ट संदेश

भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस संगठन में हलचल तेज हो गई है। पार्टी नेतृत्व इस बार किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रहा है। पिछले कुछ राज्यों में राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक नुकसान से सबक लेते हुए कांग्रेस हाईकमान ने मध्य प्रदेश के नेताओं पर विशेष नजर रखना शुरू कर दिया है। पार्टी की कोशिश है कि तीसरी सीट पर किसी भी तरह की सेंधमारी न हो और सभी विधायक एकजुट रहें।
अरुण यादव को दिल्ली बुलाकर लिया जाएगा फीडबैक
इसी रणनीति के तहत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को अचानक दिल्ली तलब किया गया है। बताया जा रहा है कि वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर प्रदेश के राजनीतिक हालात और विधायकों की स्थिति पर चर्चा करेंगे। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी दिल्ली जाकर हाईकमान से मुलाकात कर चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, उमंग सिंघार को दो बार दिल्ली बुलाया गया, जहां उनसे विधायकों की एकजुटता और चुनावी तैयारियों को लेकर विस्तृत जानकारी ली गई। इससे साफ है कि कांग्रेस नेतृत्व चुनाव को लेकर बेहद गंभीर है।
नेताओं को साफ संदेश, सीट हर हाल में बचनी चाहिए
पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व ने प्रदेश के सभी बड़े नेताओं को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि राज्यसभा की सीट किसी भी कीमत पर नहीं गंवानी है। हाईकमान ने नेताओं से कहा है कि चुनाव के दौरान पार्टी के एक-एक विधायक को साथ रखना उनकी जिम्मेदारी होगी।
नेतृत्व का रुख काफी सख्त बताया जा रहा है। पार्टी के भीतर यह भी संकेत दिए गए हैं कि यदि किसी स्तर पर अनुशासनहीनता या क्रॉस वोटिंग जैसी स्थिति सामने आती है तो संबंधित नेताओं की जवाबदेही तय की जाएगी।
अन्य राज्यों के अनुभवों ने बढ़ाई चिंता
कांग्रेस की बढ़ी हुई सक्रियता के पीछे हाल ही में अन्य राज्यों में मिले राजनीतिक झटके भी हैं। बिहार, हरियाणा और ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था। इन घटनाओं ने कांग्रेस नेतृत्व को सतर्क कर दिया है।
यही वजह है कि मध्य प्रदेश में पार्टी ने विशेष निगरानी तंत्र सक्रिय कर दिया है। विधायकों के संपर्क, गतिविधियों और राजनीतिक रुझानों पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि चुनाव के समय किसी प्रकार की अप्रत्याशित स्थिति पैदा न हो।
चुनाव परिणाम पर टिकी राजनीतिक प्रतिष्ठा
राज्यसभा चुनाव अब कांग्रेस के लिए सिर्फ एक सीट का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह संगठनात्मक एकजुटता और नेतृत्व की पकड़ की भी परीक्षा माना जा रहा है। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस अपने विधायकों को पूरी तरह एकजुट रखकर राज्यसभा की सीट सुरक्षित बचाने में सफल हो पाएगी।
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