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खाद्य कंपनियों के भ्रामक दावों पर शिकंजा : एफएसएसएआई का नोटिस मिलते ही बदली पैकेजिंग और विज्ञापन

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 25, 2026
10:17 AM
एफएसएसएआई का नोटिस मिलते ही बदली पैकेजिंग और विज्ञापन

नई दिल्ली। खाद्य उत्पादों पर किए जा रहे भ्रामक स्वास्थ्य, पोषण और व्यापारिक दावों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। नियामक की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद कई खाद्य कंपनियों ने अपने उत्पादों और प्रचार सामग्री में बदलाव करना शुरू कर दिया है। कंपनियों ने उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले दावे हटाए, विज्ञापन वापस लिए और कुछ उत्पादों की सूची ऑनलाइन मंचों से भी हटाई है।

उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले दावों पर कार्रवाई

एफएसएसएआई का कहना है कि खाद्य उत्पादों के लेबल, पैकेजिंग और विज्ञापनों में ऐसी जानकारी नहीं दी जा सकती, जिससे उपभोक्ता किसी उत्पाद की गुणवत्ता या विशेषता को लेकर भ्रमित हो। नियामक के मुताबिक, नोटिस मिलने के बाद कई खाद्य कारोबार संचालकों ने नियमों का पालन करते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए हैं।

मोंडेलेज इंडिया ने हटाए दावे और विज्ञापन

मोंडेलेज इंडिया फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के कुछ उत्पादों पर स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े तुलनात्मक दावों को लेकर आपत्ति जताई गई थी। एफएसएसएआई की ओर से नोटिस मिलने के बाद कंपनी ने संबंधित दावों और विज्ञापनों को प्रमुख ऑनलाइन खरीदारी मंचों से हटा दिया। कंपनी ने नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपने प्रचार और उत्पाद संबंधी जानकारी में संशोधन भी किया।

सैपियंस लैब्स ने प्रचार सामग्री वापस ली

सैपियंस लैब्स को भी उत्पाद से जुड़े एक भ्रामक दावे को लेकर नोटिस भेजा गया था। इसके बाद कंपनी ने नियामक को अपना जवाब सौंपा और संबंधित उत्पाद से जुड़े दावे तथा प्रचार सामग्री वापस लेने की जानकारी दी।

ऑनलाइन मंच से हटाया गया विवादित उत्पाद

एक अन्य मामले में विची एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विपणन किए जा रहे तथा मिसेज जानकी जय बारोट और जेजे फूड्स द्वारा प्रसंस्कृत एवं पैक किए गए उत्पाद पर भ्रामक व्यापारिक नाम के इस्तेमाल का मामला सामने आया। एफएसएसएआई के हस्तक्षेप के बाद फ्लिपकार्ट से जवाब मांगा गया और संबंधित उत्पाद को मंच से हटा दिया गया।

एमवे ने पैकेजिंग से हटाया ‘100 प्रतिशत’

एमवे इंडिया एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के उत्पाद ‘100 प्रतिशत शुद्ध नारियल तेल’ के नाम में ‘100 प्रतिशत’ शब्द के इस्तेमाल पर भी नियामक ने आपत्ति जताई। एफएसएसएआई के अनुसार यह खाद्य सुरक्षा कानून और विज्ञापन एवं दावों से जुड़े नियमों के अनुरूप नहीं था।

नोटिस के बाद कंपनी ने अनुपालन रिपोर्ट सौंपकर बताया कि उसने पैकेजिंग और प्रचार सामग्री से ‘100 प्रतिशत’ शब्द हटा दिया है। पुराने भंडार की बिक्री भी बंद कर दी गई है और संशोधित पैकेजिंग वाले उत्पाद बाजार में उतारे जा रहे हैं।

उपभोक्ता हितों पर एफएसएसएआई का जोर

एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल कंपनियों से नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं तक सही और तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाना भी है। नियामक ने संकेत दिया है कि खाद्य उत्पादों के भ्रामक दावों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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