एमपी बनेगा एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी स्टेट : भोपाल–विदिशा को 1757 करोड़ की सौगात, सीएम बोले- कनेक्टिविटी से रफ्तार पकड़ेगा विकास

भोपाल। मध्यप्रदेश में सड़क और एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के विस्तार को गति देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश मेट्रोपोलिटन विकास, आधुनिक अधोसंरचना और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। सरकार भोपाल, इंदौर और उज्जैन सहित प्रमुख शहरों को आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ने के साथ नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे विकसित कर रही है। इनमें सागर–सतना एक्सप्रेस-वे महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसके बनने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय करीब आधा हो जाएगा।
6-7 घंटे का सफर घटकर 3 से साढ़े 3 घंटे
मुख्यमंत्री के अनुसार, पहले चरण में तीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इनमें सागर–सतना एक्सप्रेस-वे के अलावा भोपाल–मंदसौर और जबलपुर–आशापुर एक्सप्रेस-वे शामिल हैं। तीनों की कुल लंबाई करीब 794 किलोमीटर और अनुमानित लागत 38,456 करोड़ रुपए है।
सागर–सतना एक्सप्रेस-वे के निर्माण के बाद वर्तमान में लगने वाला करीब 6 से 7 घंटे का समय घटकर लगभग 3 से साढ़े 3 घंटे रह जाने का अनुमान है। इससे बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के बीच आवागमन आसान होगा तथा व्यापार, उद्योग और पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
926 किमी के चार नए एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित
सरकार दूसरे चरण में करीब 926 किलोमीटर लंबे चार और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे विकसित करने की तैयारी में है। इनमें सागर–जबलपुर, कटनी–सिंगरौली, भोपाल–जबलपुर और भोपाल–ग्वालियर एक्सप्रेस-वे शामिल हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश के प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और आर्थिक केंद्रों के बीच तेज और निर्बाध संपर्क स्थापित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सात एक्सप्रेस-वे विकसित होने पर मध्यप्रदेश को देश में बेहतर एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी वाले राज्यों में स्थापित करने में मदद मिलेगी। बेहतर सड़क नेटवर्क से यात्रा समय और ईंधन की बचत के साथ सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा।
भोपाल–विदिशा फोरलेन को मंजूरी की तैयारी
इसी क्रम में भोपाल–विदिशा मार्ग को चार-लेन करने की परियोजना को मंत्रि-परिषद के समक्ष स्वीकृति के लिए रखा जा रहा है। 1,757 करोड़ 55 लाख रुपए की लागत वाली इस परियोजना में 44.83 किलोमीटर लंबे वर्तमान दो-लेन मार्ग को पेव्ड शोल्डर सहित चार-लेन किया जाएगा।
मार्ग पर सूखी सेवनिया, बेरखेड़ी और सलामतपुर में कुल 8.25 किलोमीटर के तीन बायपास बनाए जाने प्रस्तावित हैं। इससे आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होगा और दुर्घटनाओं की आशंका घटेगी। यह मार्ग भोपाल–कानपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए महत्वपूर्ण फीडर कॉरिडोर के रूप में भी काम करेगा।
उज्जैन–इंदौर क्षेत्र में भी तेज होगा सड़क नेटवर्क
उज्जैन–इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में इंदौर–उज्जैन छह-लेन, इंदौर–उज्जैन ग्रीनफील्ड चार-लेन, उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड चार-लेन और उज्जैन–मक्सी मार्ग जैसी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इंदौर–उज्जैन छह-लेन परियोजना में करीब 80 प्रतिशत भौतिक प्रगति हो चुकी है। उज्जैन–जावरा मार्ग के जरिए उज्जैन को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
ढाई साल में 29,693 किमी सड़कों का निर्माण-उन्नयन
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश में 29,693 किलोमीटर सड़कों का निर्माण और उन्नयन पूरा किया है। इसके अलावा हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत 18,166 करोड़ रुपए की लागत से 444 किलोमीटर लंबी सात परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
वर्ष 2026-27 से 2030-31 के रोड नेटवर्क मास्टर प्लान में 1,226 मार्गों की 29,682 किलोमीटर लंबाई के विकास और उन्नयन का लक्ष्य रखा गया है। इसकी अनुमानित लागत 88,634 करोड़ रुपए है। सरकार का दावा है कि आधुनिक सड़क और एक्सप्रेस-वे नेटवर्क प्रदेश में निवेश, उद्योग, पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसरों का आधार बनेगा।
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