छत्तीसगढ़ सरगुजा : लखनपुर विकासखंड में सरकारी राशन व्यवस्था की खुली पोल, 2 से 3 महीनों से नहीं मिला ग्रामीणों को राशन, नाराज ग्रामीणों ने आधी को मचाया हंगामा

सरगुजा के लखनपुर विकासखंड से संवाददाता तनवीर आलम की रिपोर्ट
सरगुजा संभाग: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी राशन व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है… जहां भूख और इंतजार से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा… और हालात इतने बिगड़ गए कि लोगों ने राशन दुकान संचालक को ही बंधक बना लिया। घटना ग्राम रजपुरीकला की है… जहां देर रात तक चले हंगामे के बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा… और अगली सुबह प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। अब सवाल ये है क्या ये सिर्फ एक गांव की समस्या है या पूरे सिस्टम की बड़ी खामी?

सरकार भले ही गरीबों तक मुफ्त राशन पहुंचाने के दावे कर रही हो… लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम रजपुरीकला में राशन वितरण की अव्यवस्था ने ग्रामीणों को इस कदर परेशान कर दिया… कि उनका गुस्सा आधी रात को फूट पड़ा। बताया जा रहा है कि गुरुवार की रात… राशन लेने के लिए सुबह से कतार में खड़े ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया।
रात होते ही जब राशन वितरण बंद कर दिया गया… तो महीनों से राशन का इंतजार कर रहे लोगों ने राशन दुकान के सामने हंगामा शुरू कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि ग्रामीणों ने राशन दुकान संचालक को घर जाने से रोक दिया… और देर रात तक उसे वहीं बैठाए रखा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनपुर थाना प्रभारी संपत पोटाई मौके पर पहुंचे… और काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रण में लिया। करीब आधी रात 12:30 बजे के बाद जाकर मामला शांत हुआ… और तब जाकर राशन दुकान संचालक को घर जाने दिया गया
ग्रामीणों का आरोप है कि राशन वितरण में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। उनका कहना है कि उन्हें हफ्तों तक राशन दुकान के चक्कर लगाने पड़ते हैं
कई लोगों को 2 से 3 महीनों से राशन नहीं मिला है राशन दुकान संचालक मनमाने समय पर दुकान खोलता है और वितरण के दौरान अभद्र व्यवहार भी किया जाता है यही वजह है कि लोगों का गुस्सा इस कदर बढ़ गया। इस पूरी घटना में सबसे मार्मिक तस्वीर उस वक्त सामने आई… जब पंडों जनजाति की एक महिला राम बाई अपनी 12 साल की बेटी के साथ रात 12 बजे तक राशन दुकान के सामने खड़ी रही। राम बाई ने बताया कि उन्हें कई दिनों से राशन नहीं मिला… और मजबूरी में उन्हें अपनी बच्ची को रात में किसी और के घर से खाना मांगकर खिलाना पड़ा। ये सिर्फ एक कहानी नहीं… बल्कि उस दर्द की तस्वीर है… जो सिस्टम की लापरवाही से पैदा होती है।
वहीं, राशन दुकान संचालक हीरेंद्र राजवाड़े ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज नहीं किया… लेकिन इसके पीछे कई वजहें बताईं। उनका कहना है कि वो दो राशन दुकानों का संचालन कर रहे हैं सर्वर की समस्या के कारण मशीन ठीक से काम नहीं कर रही थी चावल की आपूर्ति भी पर्याप्त मात्रा में नहीं हुई और महीने का आखिरी दिन होने के कारण अचानक भीड़ बढ़ गई इन कारणों से समय पर राशन वितरण नहीं हो पाया।
घटना के अगले दिन… जैसे ही मामला प्रशासन तक पहुंचा… जिला खाद्य अधिकारी, तहसीलदार और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे।
उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की… उनकी समस्याएं सुनीं… और जल्द समाधान का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने साफ कहा कि राशन वितरण व्यवस्था में सुधार किया जाएगा
लोगों को समय पर राशन उपलब्ध कराया जाएगा और वर्तमान संचालक को हटाकर नए व्यक्ति की नियुक्ति की जाएगी साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था के तहत राशन दुकान संचालित करने की बात भी कही गई है। लेकिन सवाल सिर्फ रजपुरीकला का नहीं है…क्या प्रदेश के अन्य गांवों में भी ऐसी ही स्थिति है? क्या राशन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए लोगों को आधी रात तक इंतजार करना पड़ेगा? और सबसे बड़ा सवाल क्या सिर्फ आश्वासन से व्यवस्था सुधर जाएगी फिलहाल प्रशासन ने व्यवस्था सुधारने का भरोसा तो दे दिया है… लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ये वादे जमीनी हकीकत में कब तक बदलते हैं। क्योंकि जब बात गरीबों के हक की हो… तो देरी भी एक तरह की नाइंसाफी होती है
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
