छत्तीसगढ़ गरियाबंद : 11 साल से लापता घर का मुखिया, ढूंढने में लगे गांव के लोग और परिजन, परिवार के सामने आर्थिक परेशानी

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक के सितलीजोर गांव की यह कहानी एक ऐसे परिवार की है… जो पिछले 11 साल से अपने घर के मुखिया का इंतजार कर रहा है…45 वर्षीय पदुलोचन कश्यप…जो तेंदूपत्ता कंपनी में काम करने के लिए नक्सल प्रभावित बीजापुर गए थे…लेकिन उसके बाद आज तक घर नहीं लौटे… परिजनों के मुताबिक, 15 दिन तक कोई खबर नहीं मिलने पर बीजापुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी…लेकिन आज तक पदुलोचन कश्यप का कोई सुराग नहीं मिल सका…पत्नी निलेन्द्री कश्यप, बेटा डिंगर कश्यप और बेटी करिश्मा कश्यप…आज भी इसी उम्मीद में हैं कि घर का मुखिया एक दिन जरूर लौटेगा…इस लंबे इंतजार का असर अब परिवार की जिंदगी पर साफ दिख रहा है…राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के कारण पत्नी को कई सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा…ना धान बेच पा रही हैं… ना ही खाद और बीज की सुविधा मिल रही है…और पूरे घर की जिम्मेदारी अब निलेन्द्री कश्यप के कंधों पर है…सबसे छोटे बेटे डिंगने कश्यप ने अपने पिता को सिर्फ तस्वीरों में देखा है…और उसी तस्वीर को देखकर हर दिन उम्मीद जिंदा रखता है…बेटी करिश्मा आज भीअपने पिता को याद कर भावुक हो उठती है…और पूरा परिवार बस एक ही उम्मीद में जी रहा है… कि शायद एक दिन दरवाजा खुले…और पिता वापस लौट आएं…गांव के लोग और परिवार सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं…कि पदुलोचन कश्यप की तलाश के लिए ठोस कदम उठाए जाएं…और साथ ही इस परिवार को सरकारी योजनाओं से जोड़कर राहत दी जाए…क्योंकि 11 साल का यह इंतजार अब सिर्फ उम्मीद नहीं…एक दर्द बन चुका है…11 साल… एक परिवार… और एक अधूरा इंतजार…जहां हर दिन उम्मीद के साथ शुरू होता है… और उसी उम्मीद पर खत्म…कि शायद आज…पदुलोचन कश्यप घर लौट आएं
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
