अकलतरा में 400 केवी टावर गिरा : ग्रिड फेल होते ही ठप हुई 1800 मेगावाट बिजली, कई राज्यों पर मंडराया अंधेरे का खतरा, तेज आंधी बनी तबाही की वजह

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा क्षेत्र में बीते दिनों आई तेज आंधी ने बिजली व्यवस्था को बड़ा झटका दे दिया। नरियरा के पास 400 केवी हाईटेंशन ट्रांसमिशन टावर अचानक धराशायी हो गया। टाॅवर गिरते ही पूरा पावर ग्रिड अस्थिर हो गया है। इतना ही नहीं जेएमपीसीएल प्लांट की 1800 मेगावाट क्षमता वाली तीनों यूनिटें एक साथ ट्रिप कर बंद हो गईं। देखते ही देखते पूरे संयंत्र में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई।
प्लांट में मचा हड़कंप, बायलर से आई तेज आवाजें
ग्रिड फेल होते ही संयंत्र के बायलर और टर्बाइन सेक्शन में दबाव तेजी से बदलने लगा। इसके कारण जोरदार कंपन और धमाके जैसी आवाजें सुनाई दीं। अचानक हुई इस तकनीकी घटना से कर्मचारियों और ऑपरेशन स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई। कंट्रोल सिस्टम, उत्पादन इकाइयां और आंतरिक संचालन पूरी तरह प्रभावित हो गए। कई कर्मचारियों ने इसे वर्षों में हुई सबसे गंभीर तकनीकी घटना बताया।

क्यों हुआ इतना बड़ा ब्लैकआउट
विशेषज्ञों के अनुसार 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन बिजली संयंत्र और राष्ट्रीय ग्रिड के बीच सबसे अहम कड़ी होती है। टावर गिरते ही लोड बैलेंस बिगड़ गया और सुरक्षा प्रणाली सक्रिय हो गई। इसके बाद प्लांट की सभी यूनिटों को स्वतरू बंद कर दिया गया, ताकि मशीनों को बड़े नुकसान से बचाया जा सके। तकनीकी भाषा में इसे “ग्रिड फेल्योर आधारित ब्लैकआउट” कहा जाता है।
कई राज्यों में बिजली संकट की आशंका
जेएमपीसीएल से बनने वाली बिजली पीजीसीआई नेटवर्क के जरिए कई राज्यों तक पहुंचाई जाती है। ऐसे में 400 केवी लाइन बंद रहने से वैकल्पिक ग्रिड पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द बहाली नहीं हुई तो पीक डिमांड के दौरान कई राज्यों में लोड मैनेजमेंट और बिजली सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
बहाली में लग सकते हैं सात दिन
तकनीकी टीमों के मुताबिक हाईटेंशन टावर को दोबारा खड़ा करना आसान नहीं है। लाइन स्ट्रिंगिंग, सुरक्षा परीक्षण और ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन जैसी जटिल प्रक्रियाओं के कारण पूरी व्यवस्था सामान्य होने में पांच से सात दिन लग सकते हैं। तब तक प्लांट का उत्पादन बंद रहने की आशंका बनी हुई है।
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