OBC Reservation : MP में ओबीसी आरक्षण पर फिर टली सुनवाई, अब 13 मई से लगातार 3 दिन होगी हियरिंग

जबलपुर। मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे बहुचर्चित प्रकरण में एक बार फिर सुनवाई टलने पर सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार आधे से अधिक आबादी वाले समुदाय के साथ नूरा कुश्ती का खेल खेल रही है और जानबूझकर मामले को लंबा खींचा जा रहा है। बताया गया कि जनवरी 2025 में जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इन मामलों की सुनवाई करने जा रहा था तब सरकार ने सभी प्रकरण सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर करा दिए। सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के लिए अधिवक्ता पी. विलशन और शशांक रतनू को नियुक्त किया गया, लेकिन रिकॉर्ड और शपथपत्र मांगे जाने के बाद उन्हें हटा दिया गया और मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए गए।
प्रकरण वापस मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भेजे
एसोसिएशन का दावा है कि उसके अधिवक्ताओं की सक्रियता के बाद सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए कई आवेदन और इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल की गईं, जिसके बाद सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी और 20 मार्च 2026 के आदेशों में यह मानते हुए कि मामले गलत तरीके से ट्रांसफर कराए गए सभी प्रकरण वापस मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भेज दिए और तीन माह में विशेष बेंच बनाकर निराकरण का अनुरोध किया।
कोई अधिवक्ता नहीं हुआ उपस्थित
आरोप है कि इसके बावजूद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में भी सुनवाई को आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की। 23 मार्च और 2 अप्रैल की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 27, 28 और 29 अप्रैल को अंतिम बहस तय की थी। साथ ही 15 और 21 अप्रैल को रजिस्ट्रार कोर्ट में दस्तावेजों और रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आरोप है कि सरकार की ओर से रजिस्ट्रार कोर्ट में एक बार भी कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ।
पक्ष रखने एक दिन का मांगा समय
27 अप्रैल की सुनवाई में हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से बहस का समय पूछा जबकि महाधिवक्ता ने सरकार की ओर से पक्ष रखने को लेकर एक दिन का समय मांगा। 28 अप्रैल को सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने जीएडी का 27 अप्रैल का आदेश पेश करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एएसजी के.एम. नटराज के माध्यम से पक्ष रखने की बात कही।
उदासीनता के चलते एक बार फिर सुनवाई बढ़ी
ओबीसी पक्ष का आरोप है कि तुषार मेहता के नाम पर पहले भी 60 से अधिक बार समय लिया जा चुका है और सरकार की उदासीनता के चलते एक बार फिर सुनवाई आगे बढ़ गई। बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट से चार याचिकाओं का रिकॉर्ड भी समय पर नहीं मंगाया जा सका, जिसके चलते हाईकोर्ट को सुनवाई 13, 14 और 15 मई के लिए तय करनी पड़ी।मामले में ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, वरुण ठाकुर, शशांक रतनू, पुष्पेंद्र शाह, अखिलेश प्रजापति, उदय कुमार साहू, रमेश प्रजापति और परमानंद साहू उपस्थित रहे।
नीरज द्विवेदी
5 साल से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव। टीवी और प्रिंट मीडिया में कलमकारी की है। पॉलिटिकल और पब्लिक कनेक्ट की खबरों में दिलचल्पी। TV27NEWS DIGITAL में एंकरिंग भी कर रहे हैं।
