हिन्दुओं की है भोजशाला! : इंदौर हाईकोर्ट ने हिन्दू के पक्ष में दिया ऐतिहासिक फैसला, परिसर को माना मां वाग्देवी का मंदिर, धार में हाईअलर्ट

इंदौर। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और पुरातात्विक अध्ययन के आधार पर यह परिसर अपने मूल स्वरूप में एक हिंदू मंदिर के रूप में प्रतीत होता है। इस फैसले को हिंदू पक्ष के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इतना ही नहीं कोर्ट ने अपने फैसले में परिसर को मां वाग्देवी के मंदिर भी माना है। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद धार जिले की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासन स्थिति की संवेदनशीलता को देखते पूरी तरह से हाई अलर्ट पर हैं।
भोजशाला मामले में कोर्ट के फैसले में परिसर को मां वाग्देवी के मंदिर के रूप में माना गया है। फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी तरह सतर्क और हाई अलर्ट पर हैं।
एएसआई सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन पर भरोसा
कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई ) द्वारा किए गए सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन को आधार मानते हुए कहा कि पुरातत्व एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है और इसके निष्कर्षों को न्यायिक प्रक्रिया में महत्व दिया जा सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भोजशाला का प्रारंभिक स्वरूप संस्कृत शिक्षा केंद्र से जुड़ा रहा है, जिससे इसके ऐतिहासिक महत्व को और मजबूती मिलती है।
हिंदू पक्ष का दावा- खिलजी के आदेश पर तोड़ा गया मंदिर
भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष ने इससे पहले अदालत में दावा किया था कि परमार वंश के राजा भोज ने वर्ष 1034 में भोजशाला परिसर में देवी सरस्वती का मंदिर बनवाया था। हिंदू पक्ष के अनुसार, वर्ष 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर इस मंदिर को तोड़ दिया गया और उसके अवशेषों का उपयोग कर मस्जिद का निर्माण किया गया।
सरकार की जिम्मेदारी पर टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण सुनिश्चित करे। इसके साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार का दायित्व है।
मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
अदालत ने मुस्लिम पक्ष को यह छूट दी है कि वे नमाज अदा करने के लिए धार जिले में किसी अन्य स्थान के लिए सरकार से संपर्क कर सकते हैं। इससे दोनों पक्षों के हितों को संतुलित रखने की कोशिश की गई है।
प्रबंधन को लेकर निर्देश
कोर्ट ने केंद्र सरकार और एएसआई को यह निर्देश दिया है कि भोजशाला परिसर के समग्र प्रबंधन और संरक्षण की जिम्मेदारी जारी रखी जाए। साथ ही संस्कृत शिक्षा और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण से जुड़े निर्णय भी नियमों के तहत लिए जाएं।
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