मैं पापा के बिना नहीं जाऊंगा : उज्जैन की जेल में पिता के साथ मासूम की जिद, बच्चे की भावनाओं ने अदालत को भी किया भावुक

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इंसान और कानून दोनों को भावुक कर दिया है। दरअसल एक चार के मासूम की अपने पिता के साथ जेल में रहने की जिद ने न सिर्फ कानून को प्रभावित किया, बल्कि पूरे मामले को ही संवेदनशीन बना दिया। अदातल में सुनवाई के दौरान मासूम बार-बार यही गुहार लगाता रहा कि मैं पापा के साथ जाऊंगा मैं उनके बिना नहीं रहूंगा।” बच्चे की यह मासूम जिद देखकर अदालत का माहौल भी भावुक हो गया।
मां की आत्महत्या के बाद पिता गिरफ्तार, बच्चा भी साथ
मामला उज्जैन के देवास रोड स्थित एक कॉलोनी का है। करीब एक महीने पहले एक महिला ने आत्महत्या कर ली थी। जांच के बाद पुलिस ने उसके पति को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के समय चार साल का बेटा भी अपने पिता के साथ मौजूद था और वहीं से यह मामला और भी संवेदनशील बन गया।
नाना-नानी की कोशिश, लेकिन बच्चे ने किया इनकार
कोर्ट में बच्चे के नाना-नानी ने उसे अपने साथ रखने की इच्छा जताई, लेकिन मासूम ने साफ तौर पर उनके साथ जाने से इनकार कर दिया। वह बार-बार अपने पिता के पास रहने की बात दोहराता रहा। बच्चे की इस भावनात्मक स्थिति को देखते हुए अदालत ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे अंतरिम रूप से पिता के साथ भेजने का निर्णय लिया।
भैरवगढ़ जेल में पिता के साथ रह रहा मासूम
फैसले के बाद पिता और बच्चे को उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल भेज दिया गया। जेल प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि बच्चे की देखभाल में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी जाएगी। उसे दूध, पौष्टिक भोजन, कपड़े, पढ़ाई और खेलकूद की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि उसका बचपन सुरक्षित रहे।
जेल प्रशासन की विशेष व्यवस्था और संवेदनशीलता
भैरवगढ़ जेल अधीक्षक के अनुसार, बच्चे को अपराधियों से दूर सुरक्षित वातावरण में रखा जाएगा। प्रशासन का कहना है कि बच्चे पर जेल के माहौल का नकारात्मक असर न पड़े, इसके लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
क्यों बना यह मामला चर्चा का विषय
यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में बच्चों को रिश्तेदारों के पास भेजा जाता है, लेकिन इस बार बच्चे की भावनात्मक जिद और उसके फैसले को प्राथमिकता देते हुए अदालत ने उसे पिता के साथ जेल में रहने की अनुमति दी। यह संभवतः पहला ऐसा मामला माना जा रहा है, जहां एक छोटे बच्चे को अपने पिता के साथ जेल में रहने की अनुमति दी गई है।
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