एमएसपी अनाज की नीलामी, : हर जिले में आईटी हब, जानें मोहन कैबिनेट के बड़े फैसलों के बारे में

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट बैठक हुई। बैठक में कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को हरी झंडी मिली। मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया गया। इसके अलावा बैठक हर जिले में छोटे आईटी क्लस्टर खोलने और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डाॅक्टरों की भर्ती करने का भी बड़ा फैसला लिया गया। कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी स्वयं सीएम डाॅ. मोहन यादव ने दी।
सीएम ने बताया कि समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदे गए गेहूं, धान, बाजरा और ज्वार में से जिस उपज को केंद्र सरकार केंद्रीय पूल में शामिल नहीं करेगी, उसकी राज्य सरकार नीलामी करेगी। इस निर्णय से परिवहन, भंडारण और रखरखाव पर होने वाले अतिरिक्त खर्च में कमी आएगी। उन्होंने बताया कि एमएसपी पर खरीदी गई उपज के कारण सरकार पर करीब 65 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय भार है, जिसे कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
हर जिले में विकसित होंगे छोटे आईटी क्लस्टर
प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विभिन्न जिलों में छोटे-छोटे आईटी क्लस्टर विकसित करने का फैसला किया है। इन क्लस्टरों में उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरदार सरोवर विवाद का हुआ समाधान
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े दशकों पुराने भुगतान विवाद का समाधान हो गया है। समझौते के तहत मध्य प्रदेश को बांध निर्माण लागत के हिस्से के रूप में गुजरात को 217 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। सरकार ने इसे राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और लंबित विवादों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती अब सीधे करेगा विभाग
ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग एक वर्ष तक अपने स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती करेगा। नियुक्त चिकित्सकों के लिए संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कम से कम तीन वर्ष तक सेवाएं देना अनिवार्य होगा। इसके बाद उनका स्थानांतरण सामान्य प्रक्रिया के तहत किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
10 साल बाद शुरू हुई पदोन्नतियों का स्वागत
बैठक में मंत्रियों ने प्रदेश में लगभग एक दशक बाद पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अभिनंदन किया। उल्लेखनीय है कि मई 2016 से रुकी पदोन्नतियां 1 जुलाई 2026 से फिर शुरू कर दी गई हैं। सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी एवं गतिशील बनेगी।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
