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36 साल की न्यायिक सेवा के बाद ऐसी विदाई : जस्टिस सिंह ने देहदान के साथ 1.1 करोड़ दान का लिया संकल्प, फैसले ने किया भावुक

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Sep 18, 2026
06:37 AM
जस्टिस सिंह ने देहदान के साथ 1.1 करोड़ दान का लिया संकल्प, फैसले ने किया भावुक

जबलपुर। न्याय की कुर्सी से विदाई का पल जब समाजसेवा के संकल्प में बदल गया, तो मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का माहौल भावुक हो उठा। ऐसा दृश्य हाईकोर्ट में तब देखने को मिला, जब 36 वर्षों की न्यायिक यात्रा पूरी करने के बाद जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह 17 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त हुए। विदाई समारोह में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने देहदान के साथ अपनी जीवनभर की कमाई का बड़ा हिस्सा समाजहित में समर्पित करने की घोषणा की। उनके इस इन फैसलों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।

‘अपने लिए जिए तो क्या जिए’, जस्टिस सिंह का भावुक संदेश

विदाई समारोह में अपने संबोधन के दौरान जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने कहा कि जीवन केवल स्वयं के लिए जीने का नाम नहीं है। उन्होंने अपने जीवन की कमाई और मृत्यु के बाद अपने शरीर को समाज के लिए समर्पित करने का संकल्प साझा किया। उन्होंने विदाई समारोह में अपनी जीवनभर की कमाई से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण निर्णय सार्वजनिक किया। उन्होंने अपने सामान्य भविष्य निधि की 1 करोड़ 1 लाख रुपये की राशि प्रधानमंत्री केयर्स कोष में दान करने की घोषणा की।

1990 में शुरू हुआ था न्यायिक सफर

जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने वर्ष 1990 में सिविल जज के रूप में अपने न्यायिक जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने न्यायिक सेवा में विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं और अनेक मामलों में न्यायिक निर्णय दिए। लगातार 36 वर्षों तक न्याय व्यवस्था से जुड़े रहने के बाद मई 2023 में उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।

करीब तीन साल हाईकोर्ट में निभाई जिम्मेदारी

हाईकोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर जस्टिस सिंह ने करीब तीन वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न मामलों की सुनवाई की और अपने न्यायिक दायित्वों का निर्वहन किया। 17 सितंबर 2026 को उनकी सेवानिवृत्ति के साथ ही उनके 36 वर्ष लंबे न्यायिक सफर का औपचारिक रूप से समापन हो गया।

सेवानिवृत्ति के बाद हाईकोर्ट में 38 न्यायाधीश

जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या घटकर 38 रह गई है। विदाई समारोह में उनके सहकर्मियों और न्यायिक अधिकारियों ने उनके लंबे सेवाकाल को याद किया। हालांकि, समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब जस्टिस सिंह ने देहदान और अपनी भविष्य निधि की बड़ी राशि समाजहित में देने का संकल्प साझा किया। उनके इन फैसलों ने उनकी विदाई को एक यादगार अवसर बना दिया।

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