मप्र में फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की खुलने लगी परतें : एसटीएफ की जांच में पाकिस्तान बॉर्डर कनेक्शन और कच्छ से जुड़ी कड़ियां मिलने पर मचा हड़कंप

भोपाल। मध्य प्रदेश में बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं। अब इस पूरे मामले में गुजरात के कच्छ जिले का कनेक्शन सामने आने से जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। कच्छ पाकिस्तान की सीमा से सटा इलाका है, ऐसे में इस कनेक्शन को जांच के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
नागपुर से पकड़े आरोपी का कच्छ कनेक्शन
एसटीएफ की जांच में नागपुर से पकड़े गए एक आरोपी का पासपोर्ट कच्छ के पते पर बना हुआ मिला है। इसके बाद जांच टीम आरोपी से लगातार गहन पूछताछ कर रही है। एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि कच्छ का पता पासपोर्ट बनवाने के लिए कैसे इस्तेमाल हुआ और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।
अब तक 70 फर्जी पासपोर्ट की पुष्टि
जांच में अब तक करीब 70 फर्जी पासपोर्ट की पुष्टि होने की बात सामने आई है। वहीं 100 से ज्यादा पासपोर्ट एसटीएफ की जांच के घेरे में हैं। अधिकारियों को आशंका है कि जाली दस्तावेजों के जरिए तैयार किए गए ऐसे पासपोर्ट की संख्या आगे चलकर 200 तक पहुंच सकती है।
15 पुलिसकर्मी और सरकारी कर्मचारी रडार पर
मामले में सरकारी सिस्टम की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसी को करीब 15 पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध लग रही है। STF यह जांच कर रही है कि दस्तावेजों के सत्यापन से लेकर पासपोर्ट जारी होने तक किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।
बौद्ध विहार और आंबेडकर पार्क के पते भी जांच में
फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की जांच के दौरान कुछ ऐसे पते भी सामने आए हैं, जो अब STF के रडार पर हैं। बौद्ध विहार और आंबेडकर पार्क के पते पर बने पासपोर्ट की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन सार्वजनिक स्थानों के पतों का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया।
कई जिलों में एसटीएफ की जांच जारी
फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए STF की टीमें ग्वालियर, भोपाल, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा और बैतूल समेत कई जगहों पर जांच कर रही हैं। संदिग्ध दस्तावेजों, पासपोर्ट आवेदन और उनसे जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।
सरकारी सिस्टम पर भी उठे सवाल
मामले की जांच अब सिर्फ आरोपियों तक सीमित नहीं है। एसटीएफ यह भी खंगाल रही है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट जारी होने की प्रक्रिया में सरकारी स्तर पर कहां चूक हुई। कच्छ कनेक्शन सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। अब एसटीएफ नेटवर्क की पूरी श्रृंखला और इसके पीछे सक्रिय लोगों की पहचान करने में जुटी है।
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