भोजशाला विवाद फिर सुप्रीम कोर्ट में : मुस्लिम पक्ष की ओर बढ़ी कानूनी चुनौती, दायर की तीसरी याचिका, हिन्दू पक्ष ने भी कसी कमर

धार। धार की बहुचर्चित भोजशाला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले में अब तीसरी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की गई है। जिब्रान अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका प्रस्तुत की है। इससे पहले शहर काजी और कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी भी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दे चुके हैं। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट अब तीनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर सकता है। हालांकि, अब तक किसी भी याचिका पर सुनवाई शुरू नहीं हुई है।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष
दरअसल, इंदौर हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर मानते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया था। इस निर्णय के बाद मुस्लिम पक्ष लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि भोजशाला मस्जिद है और इसके समर्थन में उनके पास पर्याप्त सरकारी दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं।
कमाल मौला मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की जिन रिपोर्टों का हवाला देकर भोजशाला को मंदिर बताया जा रहा है, उन्हीं में पहले इसे मस्जिद भी माना गया था। उनका दावा है कि सुप्रीम कोर्ट में वे ठोस साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।
हिन्दू पक्ष ने भी शुरू की अपनी तैयारी
दूसरी ओर, हिंदू पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट में संभावित सुनवाई को लेकर पूरी तैयारी में जुट गया है। हिंदू संगठनों और संबंधित पक्षों ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर कर दी है। इसका उद्देश्य यह है कि बिना हिंदू पक्ष को सुने किसी प्रकार का स्थगन आदेश (स्टे) जारी न किया जा सके।
मुस्लिम पक्ष ने रात में दायर की याचिका
सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट के फैसले के छह दिन बाद मुस्लिम पक्ष ने रात करीब साढ़े आठ बजे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। अब इस संवेदनशील और लंबे समय से विवादित मामले पर देश की सर्वोच्च अदालत की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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