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कुवैत फिशरीज कंपनी करेगी 7,430 करोड़ का निवेश : मप्र बनेगा फिश एक्सपोर्ट हब, सीएम मौजूदगी में एग्रीमेंट साइन, 35 हजार को मिलेगा रोजगार

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Jul 06, 2026
02:57 PM
मप्र बनेगा फिश एक्सपोर्ट हब, सीएम मौजूदगी में एग्रीमेंट साइन, 35 हजार को मिलेगा रोजगार

भोपाल। मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में सोमवार को कुवैत की अग्रणी कंपनी ज़बेदी अल-कुवैत फिशरीज कंपनी और इंदौर की कामदार्स केयर के बीच 7,430 करोड़ रुपए के निवेश और बाय-बैक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में हुए इस समझौते को प्रदेश के मत्स्य उद्योग और मछुआ समुदाय के लिए ऐतिहासिक बताया गया। यह निवेश मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के तहत किया जाएगा, जिससे प्रदेश को देश के प्रमुख मत्स्य उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

मत्स्य पालन से बढ़ेगी किसानों और मछुआरों की आय

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसान कल्याण वर्ष के तहत कृषि के साथ-साथ पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में उपलब्ध विशाल जल संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग कर मत्स्य उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मछुआरा समुदाय की आजीविका मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। कुवैत जैसे मित्र देश के साथ हुआ यह समझौता प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।

चार जलाशयों में विकसित होगा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर

समझौते के तहत इंदिरा सागर, बरगी, बाणसागर और बारना जलाशयों में आधुनिक केज कल्चर प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके साथ बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा, जिससे उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और निर्यात तक की पूरी व्यवस्था मजबूत होगी। इस परियोजना के जरिए प्रदेश में लगभग 4 लाख टन अतिरिक्त मत्स्य उत्पादन होने का अनुमान है। इससे मछली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रदेश की हिस्सेदारी राष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूत होगी।

एक्वापोनिक्स और ग्रीन हाउस से होगा सब्जियों का उत्पादन

मत्स्य परियोजना केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी। इसके साथ एक्वापोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स और ग्रीन हाउस तकनीक का उपयोग करते हुए लगभग 1.23 लाख टन सब्जियों का उत्पादन भी किया जाएगा। आधुनिक कृषि और मत्स्य पालन के इस एकीकृत मॉडल से किसानों को अतिरिक्त आय के नए अवसर मिलेंगे। इससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन प्रणाली विकसित होगी।

35 हजार रोजगार और 6 हजार करोड़ के निर्यात का लक्ष्य

परियोजना से प्रदेश में 15 हजार प्रत्यक्ष और 20 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। सरकार ने इस निवेश के माध्यम से लगभग 6 हजार करोड़ रुपए के मत्स्य निर्यात का लक्ष्य तय किया है। इससे प्रदेश के मछुआरों, युवाओं और मत्स्य उद्योग से जुड़े उद्यमियों को बड़ा लाभ मिलेगा। ज़बेदी अल-कुवैत फिशरीज कंपनी का 10 से अधिक देशों में प्रीमियम खाद्य उत्पादों का मजबूत नेटवर्क है, जिसका लाभ मध्यप्रदेश के मत्स्य उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मिलेगा। सरकार का मानना है कि यह समझौता प्रदेश को देश का अग्रणी मत्स्य निवेश और निर्यात केंद्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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