ऑनलाइन दवाओं पर घमासान : देशभर में मेडिकल स्टोर बंद, मरीजों की बढ़ी परेशानी, ग्राहकों ने बताया फायदेमंद

नई दिल्ली। ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने की मांग को लेकर देशभर में फार्मासिस्टों और केमिस्टों की हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। अखिल भारतीय रसायन और औषधि विक्रेता संगठन (एआईओसीडी) के आह्वान पर कई राज्यों में मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे मरीजों को दवाइयों के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि कुछ दुकानदारों ने मरीजों की जरूरत को देखते हुए अपनी दुकानें खुली रखीं।
मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों में हजारों मेडिकल स्टोर बंद रहे। तमिलनाडु के विलुप्पुरम जिले में करीब 1100 मेडिकल दुकानें बंद रहीं, जबकि राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में लगभग 850 थोक और खुदरा दवा दुकानों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। केमिस्टों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और इससे नकली दवाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
दिल्ली में अस्पतालों के बाहर खुले रहे मेडिकल स्टोर
दिल्ली के कुछ अस्पतालों के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर खुले दिखाई दिए। दुकानदारों ने बताया कि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए दुकानें खुली रखना जरूरी था। एक केमिस्ट ने कहा कि अस्पताल के आसपास दवा दुकानों के बंद होने से मरीजों की मुश्किलें और बढ़ सकती थीं, इसलिए उन्होंने हड़ताल के बावजूद सेवाएं जारी रखीं।
ग्राहकों ने आॅनलाइन दवा खरीद को बताया सस्ता
दूसरी ओर, ग्राहकों ने ऑनलाइन दवा खरीद को सुविधाजनक और सस्ता बताया। लोगों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाएं कम कीमत में मिलती हैं और घर तक डिलीवरी होने से समय की भी बचत होती है। कई ग्राहकों ने कहा कि आपात स्थिति में ऑफलाइन मेडिकल स्टोर जरूरी हैं, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में ऑनलाइन विकल्प काफी लाभदायक साबित हो रहे हैं।
यूपी के मंत्री ने हड़ताल को बताया गलत
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने भी केमिस्टों की हड़ताल को गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन दवा सेवा से गरीब और आम लोगों को राहत मिलती है, क्योंकि दवाइयां सस्ती और आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि हड़ताल से मरीजों और जरूरतमंद लोगों को अनावश्यक परेशानी हो रही है।
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