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शुभेंदु की पहल से राजनीतिक शिष्टाचार की शुरुआत : समीक्षा बैठक में शामिल होने टीएमसी विधायकों को भेजा न्योता, विपक्षी के साथ पहली बार हुआ ऐसा

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May 20, 2026
08:01 AM
समीक्षा बैठक में शामिल होने टीएमसी विधायकों को भेजा न्योता, विपक्षी के साथ पहली बार हुआ ऐसा

कोलकाता-सिलीगुड़ी। मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभालने के बाद शुभेंदु अधिकारी एक्शन में हैं। विकास और कानून व्यवस्था को लेकर सीएम शुभेंदु लगातार समीक्षा बैठक कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने उत्तरी बंगाल के आठ जिलों में विकास और प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा के लिए सिलीगुड़ी में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। खास बात यह है कि इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कुल 14 विधायकों को भी आमंत्रित किया गया। यह कदम राजनीतिक हलकों में एक नई परंपरा की शुरुआत और शिष्टाचार की वापसी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

माना जा रहा है कि यह पहल सरकार और पार्टी के बीच समन्वय को मजबूत करने के साथ-साथ राजनीतिक शिष्टाचार और संवाद की परंपरा को भी आगे बढ़ाने का संदेश देती है। इस कदम से यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार विकास कार्यों और संगठनात्मक तालमेल दोनों पर समान रूप से ध्यान दे रही है।

टीएमसी विधायकों को भेजा औपचारिक निमंत्रण

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के एक अधिकारी की मानें तो यह निर्णय मुख्यमंत्री के निर्देश पर लिया गया, जिनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्षी विधायकों को भी जनहित के मुद्दों और विकास योजनाओं की समीक्षा में शामिल करना चाहिए। अधिकारी ने बताया कि उत्तरी बंगाल के आठ जिलों से चुने गए सभी टीएमसी विधायकों को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया।

बैठक का उद्देश्य विकास कार्यों की समीक्षा करना

जानकारी के अनुसार, इस बैठक का उद्देश्य क्षेत्रीय विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना और स्थानीय समस्याओं पर सभी जनप्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त करना था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि प्रशासनिक निर्णयों में विपक्ष की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।

विपक्षी विधायकों को बैठकों से रखा जाता था दूर

यह भी चर्चा में है कि राज्य में पिछले कुछ वर्षों में विपक्षी विधायकों को इस तरह की सरकारी बैठकों से दूर रखा जाता रहा है, जबकि इससे पहले के शासनकाल में ऐसी परंपरा मौजूद थी, जब विपक्ष को भी प्रशासनिक बैठकों में आमंत्रित किया जाता था। अब इस नई पहल को उसी पुरानी परंपरा की वापसी के रूप में देखा जा रहा है।

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