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‘मुस्लिमों को बाहर करना हिंदू विचार नहीं’, : न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का बड़ा संदेश, कहा- विविधता में ही एकता

admin

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Aug 29, 2026
06:23 PM
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का बड़ा संदेश, कहा- विविधता में ही एकता

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित ‘एक दुनिया, एक मानवता’ कार्यक्रम में मानवता की एकता और धार्मिक विविधता को लेकर अपना दृष्टिकोण सामने रखा। उन्होंने कहा कि दुनिया में धर्म और परंपराएं भले अलग-अलग हों, लेकिन अंतिम सत्य एक है। मनुष्य अपनी सीमित समझ और अनुभवों के कारण सत्य को अलग-अलग तरीके से देखता और समझता है।

सत्य एक, उसे समझने के रास्ते अलग

भागवत ने कहा कि अलग-अलग धर्म अपने रीति-रिवाजों और अनुशासनों के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर ले जाते हैं। उन्होंने पानी की बूंदों का उदाहरण देते हुए कहा कि धरती पर गिरने वाला पानी अलग-अलग रास्तों से बहते हुए अंततः समुद्र तक पहुंचता है। इसी तरह सत्य तक पहुंचने के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल एक ही है।

उन्होंने कहा कि विविधता प्रकृति का नियम है और इसे स्वीकार करने के साथ उसका सम्मान भी किया जाना चाहिए। अलग-अलग पहचान और परंपराओं के बावजूद मानवता की मूल एकता को समझना जरूरी है।

‘उंगली नहीं, रोशनी को देखना होगा’

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी दिशा में रोशनी दिखाने के लिए उंगली उठाए, तो हमारा ध्यान उंगली पर नहीं बल्कि उस रोशनी पर होना चाहिए। इसी तरह धार्मिक परंपराओं के बाहरी स्वरूप में उलझने के बजाय उनके मूल उद्देश्य को समझना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि अंतिम सत्य और दिव्यता की खोज मानव जीवन का मूल उद्देश्य है। विज्ञान आज जिस अवधारणा को ‘चेतना’ कहता है, आध्यात्मिक परंपराएं उसे अलग-अलग नामों से समझाती रही हैं।

भारत ने हमेशा दिया शरण का संदेश

भागवत ने कहा कि भारत की परंपरा में अलग-अलग संप्रदायों और समुदायों के लिए जगह रही है। दुनिया के जिन लोगों को कहीं सुरक्षित स्थान नहीं मिला, उन्होंने भारत में शरण पाई। उन्होंने कहा कि आरएसएस मानवता की एकता के इसी विचार को दुनिया तक पहुंचाने के अपने प्रयास को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने 2018 में मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ हुए संवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदू विचार किसी समुदाय को बाहर करने की बात नहीं करता। उनके अनुसार, हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान और सभी रास्तों को सत्य की ओर जाने वाला मानना भारतीय चिंतन की विशेषता है।

राजनीति नहीं, समाज से शुरू होगा बदलाव

भागवत ने कहा कि दुनिया में बदलाव केवल राजनीति के माध्यम से नहीं लाया जा सकता। इसके लिए पहले समाज के भीतर एकता, संवाद और सेवा की भावना मजबूत करनी होगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीति पर जनमत का प्रभाव होता है, इसलिए समाज मजबूत होगा तो राजनीतिक व्यवस्था पर भी उसका असर पड़ेगा।

उन्होंने मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ संवाद की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया और कहा कि संवाद पहला कदम है, जबकि सेवा दूसरा महत्वपूर्ण माध्यम है।

सेवा में नहीं देखा जाता धर्म और पहचान

आरएसएस प्रमुख ने संगठन की सेवा गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जरूरतमंद की मदद करते समय उसके धर्म या पहचान का भेद नहीं किया जाता। उन्होंने विमान हादसे का उदाहरण देते हुए बताया कि स्वयंसेवकों ने घायलों की मदद करने के साथ मृतकों के शवों को निकालने और उनकी पहचान में भी सहयोग किया।

उन्होंने कहा कि सेवा बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के होनी चाहिए। इसी तरह के अनुभव लोगों के मन में बदलाव लाते हैं और उन्हें स्वयं समाजसेवा से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

ज्ञान से आगे बढ़कर आदत बदलने की जरूरत

भागवत ने कहा कि समस्या ज्ञान की कमी नहीं, बल्कि ज्ञान को आचरण में उतारने की है। लोग जानते हैं कि क्या सही है, लेकिन अपनी इच्छाओं और आदतों के कारण कई बार उस पर अमल नहीं कर पाते। इसलिए केवल शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि अच्छे मूल्यों का लगातार अभ्यास जरूरी है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों का एक उद्देश्य विश्वास को व्यवहार में बदलना भी है। अलग-अलग आध्यात्मिक परंपराओं में अनुभवों की समानता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रास्ते भले अलग हों, लेकिन आध्यात्मिक अनुभूति में कई समानताएं दिखाई देती हैं।

‘तीन फीट और खोदते रहिए’

लंबे सामाजिक बदलाव की जरूरत समझाने के लिए भागवत ने एक कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि कभी-कभी सफलता से पहले सिर्फ कुछ कदम और आगे बढ़ना होता है। उनके मुताबिक, एक व्यक्ति के जीवन में सब कुछ खत्म हो जाने के बाद भी उसने आखिरी प्रयास जारी रखा और जमीन में थोड़ी और खुदाई के दौरान सोना मिल गया।

उन्होंने संदेश दिया कि समाज निर्माण का काम भी ऐसा ही है। इसमें समय लग सकता है, लेकिन सही उद्देश्य के साथ प्रयास लगातार जारी रखना होगा।

मानवता को जोड़ने का अभियान जारी रखने का संकल्प

भागवत ने कहा कि दुनिया को ऐसे माहौल की जरूरत है, जहां विविधता के बीच एकता और प्रेम कायम रहे। संवाद को स्थानीय स्तर तक ले जाने और छोटे-छोटे समुदायों में सेवा तथा सहयोग का वातावरण तैयार करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि यह लंबी प्रक्रिया है और लोगों की सोच बदलना आसान नहीं है। इसके बावजूद निराश होने की जरूरत नहीं। लगातार संवाद, सेवा और व्यवहार में बदलाव के माध्यम से ऐसा समाज बनाया जा सकता है, जहां मानवता की एकता केवल विचार न रहकर जीवन का हिस्सा बने।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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