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इंतजार घड़ी खत्मः : मप्र में मानसून की दस्तक, महाकौशल के रास्ते मारी एंट्री, किसानों को अब राहत उम्मीद

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 24, 2026
10:53 AM
मप्र में मानसून की दस्तक, महाकौशल के रास्ते मारी एंट्री, किसानों को अब राहत उम्मीद

भोपाल। मध्यप्रदेश के जनता की इंतजार की घड़ी खत्म हो गई है। आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने बुधवार को प्रदेश में दस्तक दे दी है। मौसम विभाग के मुताबिक मप्र में मानूसन बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी के रास्ते प्रदेश में प्रवेश कर चुका है। जो बड़ी राहत देने वाली है। इस बार मानूसन तय समय से 9 दिनों की देरी से पहुंचा है।

बता दें कि मप्र में मानूसन की दस्तक 15-16 तक हो जाती थी, लेकिन इस बार मानूसन मप्र में मानूसन 24 जून को प्रवेश किया है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले तीन से चार दिनों में यह तेजी से आगे बढ़ेगा और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर लेगा।

प्री-मानसून गतिविधियों से 39 जिलों में बरसे बादल

मानसून की औपचारिक एंट्री से पहले ही प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो चुकी थीं। पिछले 24 घंटों के दौरान 39 जिलों में बारिश और आंधी दर्ज की गई। इंदौर, भोपाल, रायसेन, सीहोर, धार, उज्जैन, राजगढ़, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सिवनी, जबलपुर, ग्वालियर और सागर सहित कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई, जबकि बालाघाट में ओलावृष्टि भी देखने को मिली।

बारिश का बड़ा घाटा अभी भी बरकरार

मानसून में देरी का असर जून के बारिश के आंकड़ों पर साफ दिखाई दे रहा है। एक जून से अब तक प्रदेश में औसतन 78.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 37.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य से 53 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर समेत 48 जिलों में बारिश का स्तर सामान्य से नीचे बना हुआ है।

खेती पर पड़ा असर, किसानों को अब अच्छी बारिश का इंतजार

कम बारिश के कारण सोयाबीन सहित खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बुवाई के लिए पर्याप्त नमी तैयार करने हेतु कम से कम चार इंच बारिश जरूरी होती है। फिलहाल भोपाल ऐसा प्रमुख जिला है, जहां करीब पांच इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य से 63 प्रतिशत अधिक है।

अगले कुछ दिन अहम

मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में प्रदेशभर में बारिश की गतिविधियां और तेज होंगी। इससे खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी, जलाशयों का जलस्तर सुधरेगा और भूजल भंडार को भी राहत मिलेगी। मानसून की यह शुरुआत किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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