कोलकाता में मौत का मलबा: : निर्माणाधीन गोदाम का शेड ढहा, 5 मजदूरों की मौत, कई जिंदगी अब भी फंसी, भारी बीम और स्लैब बने मौत का कारण

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार को एक निर्माणाधीन गोदाम का शेड अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में अब तक 5 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 21 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। मलबे में अभी भी कई मजदूरों के दबे होने की आशंका है। राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है और सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, दमकल विभाग तथा पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार लोगों को निकालने में जुटी हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय बड़ी संख्या में मजदूर निर्माण कार्य में लगे थे। अचानक लोहे के भारी बीम और कंक्रीट के विशाल स्लैब उनके ऊपर गिर पड़े, जिससे कई मजदूरों को संभलने या बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। मलबे में दबे लोगों की चीख-पुकार सुनाई देती रही, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने भी बचाव दल के साथ राहत कार्य में सहयोग किया।
चार घायलों की हालत गंभीर
घायलों को तत्काल एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों के अनुसार चार लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। बचाव एजेंसियों का कहना है कि मलबे के भीतर अभी भी कुछ लोगों के जीवित होने की संभावना है। उनसे संपर्क स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं तथा विशेष पाइपलाइन के जरिए भोजन और पानी भी पहुंचाया गया है।
1 अगस्त तक निर्माण कार्यों पर रोक
हादसे के बाद राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के अधिकार क्षेत्र में चल रहे सभी निर्माणाधीन भवनों के कार्य तत्काल प्रभाव से रोक दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी व्यावसायिक निर्माण परियोजनाओं का तकनीकी ऑडिट कराया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू करने की अनुमति मिलेगी। फिलहाल 1 अगस्त तक निर्माण गतिविधियां स्थगित रहेंगी।
भवन के नक्शे में खामियों की आशंका
प्रारंभिक जांच में भवन के नक्शे और निर्माण प्रक्रिया में तकनीकी खामियों की आशंका जताई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हादसे की विस्तृत जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मृतकों की पहचान रोहित चौधरी और कृष्णा चौधरी के रूप में हुई है, जबकि एक अन्य मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है।
गैस कटर और ड्रिलिंग से चल रहा रेस्क्यू
मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने में भारी लोहे के बीम और मोटी सरिया सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इन्हें हटाने के लिए गैस कटर और ड्रिलिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्य सरकार ने राहत कार्यों की निगरानी के लिए नबन्ना में कंट्रोल रूम स्थापित किया है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी घटना की जांच का भरोसा देते हुए कहा कि राहत अभियान पूरा होने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
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