बुधवार, 24 जून 202608:10:39 PM
Download App
Home/देश

पार्टी की चुनोतियों पर खुलकर बोली टीएमसी सांसद : शुभेंदु के साथ पुराने संबंधों को किया याद, पार्टी रणनीति पर भी महुआ ने उठाए सवाल

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 24, 2026
11:08 AM
शुभेंदु के साथ पुराने संबंधों को किया याद, पार्टी रणनीति पर भी महुआ ने उठाए सवाल

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी की चुनावी चुनौतियों, नेताओं की बगावत और संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी नेतृत्व को समय-समय पर अपने नेताओं का मूल्यांकन करना चाहिए था कि वे संगठन और चुनाव चिह्न के सहारे के बिना जनता के बीच कितना प्रभाव रखते हैं। महुआ ने कहा कि पार्टी कई बार पुराने नेताओं को बदल सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनके मुताबिक, शीर्ष नेतृत्व की सोच रही कि लंबे समय से जुड़े नेताओं को अचानक हटाना उचित नहीं होगा।

महुआ मोइत्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने सहयोगियों के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाए रखती हैं और सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश करती हैं। उन्होंने कहा कि यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन कई बार यही कमजोरी भी साबित होती है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी ने अधिक सख्ती और निष्पक्षता के साथ नेताओं का आकलन किया होता तो वर्तमान स्थिति अलग हो सकती थी। कई नेताओं ने अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं लिया।

शुभेंदु अधिकारी के साथ पुराने दिनों को किया याद

महुआ मोइत्रा ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के साथ अपने पुराने रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब दोनों एक ही दल में थे, तब शुभेंदु अधिकारी ने कई अवसरों पर उनका साथ दिया था।

महुआ ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार करीमपुर से चुनाव लड़ा था, तब बहुत कम लोग उनके समर्थन में आए थे, लेकिन उनकी पहली सभा में शुभेंदु अधिकारी पहुंचे थे। उन्होंने एक भावुक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं मिला था, जिसके कारण वह पूरी रात रोती रहीं। उस दौरान शुभेंदु अधिकारी ने उनका हौसला बढ़ाया और भरोसा दिलाया कि वह उनके साथ हैं।

यूसुफ पठान और फिरहाद हकीम पर जताई नाराजगी

महुआ ने पार्टी में हुई बगावत पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों का चयन पार्टी नेतृत्व करता है और हर फैसला सही साबित हो, यह जरूरी नहीं होता। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ फैसले गलत साबित हुए हैं। फिरहाद हकीम को लेकर उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति पार्टी क्यों छोड़ता है, इसका जवाब वही दे सकता है। उनके अनुसार, राजनीतिक दल बदलने के पीछे अक्सर लालच या भय जैसी वजहें होती हैं।

सयानी घोष के फैसले पर जताया आश्चर्य

महुआ मोइत्रा ने कहा कि उन्हें सयानी घोष से काफी उम्मीदें थीं। उनके अनुसार, पार्टी ने उन्हें कम समय में कई बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी थीं। ऐसे में उनके फैसले ने उन्हें हैरान किया। उन्होंने अंत में कहा कि वह अपने पूरे राजनीतिक जीवन में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ वैचारिक लड़ाई जारी रखेंगी और विपक्ष की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाती रहेंगी।

प्रफुल्ल तिवारी
Written By

प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें