त्विशा शर्मा आत्महत्या मामला : सास गिरिबाला सिंह को हाईकोर्ट से नहीं मिली फौरी राहत, जमानत पर सीबीआई ने लगाया अड़ंगा

जबलपुर। त्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं। जमानत वाली याचिका पर मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई में भी उन्हें राहत नहीं मिली है। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने जमानत का भारी विरोध किया। साथ ही जांच एजेंसी ने अपना पक्ष रखते हुए लिखित आपत्ति पेश करने के लिए अदालत से समय मांगा। मामले की सुनर्वा हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी ने की। अब अगली सुनवाई में जांच एजेंसी की लिखित आपत्ति के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी।
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अदालत में आपत्ति दर्ज कराई गई। हालांकि, लिखित जवाब पेश करने के लिए सीबीआई ने न्यायालय से समय मांगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सीबीआई को लिखित आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दे दी। इसके चलते मंगलवार को हुई सुनवाई में जमानत याचिका पर कोई अंतिम आदेश नहीं हो सका।
बहू की आत्महत्या के बाद दर्ज हुआ था मामला
गौरतलब है कि त्विशा शर्मा की आत्महत्या के मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे के खिलाफ भोपाल के कटारा थाने में प्रकरण दर्ज किया गया था। मामले ने उस समय काफी चर्चा बटोरी थी। आरोपों और जांच के बीच गिरिबाला सिंह की ओर से न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
इससे पहले भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय ने उन्हें अग्रिम जमानत का लाभ दिया था। बाद में मामले को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया गया। हाईकोर्ट ने पूर्व में उनकी अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। इसके बाद अब गिरिबाला सिंह की ओर से दोबारा जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।
अब सीबीआई के जवाब पर टिकी अगली सुनवाई
मंगलवार को हुई सुनवाई में सीबीआई ने जमानत दिए जाने का स्पष्ट विरोध किया और लिखित आपत्ति पेश करने के लिए समय मांगा। न्यायालय ने सीबीआई को एक सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई के लिए मामला आगे बढ़ा दिया है।
अब मामले में अगली सुनवाई सीबीआई की लिखित आपत्ति सामने आने के बाद होगी। फिलहाल पूर्व जज गिरिबाला सिंह को हाईकोर्ट से जमानत के मामले में कोई अंतिम राहत नहीं मिली है। अगली सुनवाई में सीबीआई के तर्क और आपत्ति के आधार पर न्यायालय मामले पर आगे विचार करेगा।
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