जीतू पटवारी ने की हाई लेवल बैठक : MP कांग्रेस में घर वापसी पर घमासान, बागियों की वापसी के खिलाफ जिलाध्यक्षों ने उठाई NO ENTRY की मांग

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में बीजेपी में जा चुके नेताओं की घर वापसी को लेकर अंदरूनी असहमति सामने आने लगी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की समीक्षा बैठक में जिलाध्यक्षों और प्रभारियों ने ऐसे नेताओं की वापसी पर सवाल उठाए, जिन्होंने पार्टी के मुश्किल वक्त में कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था। खासकर नर्मदापुरम और विदिशा के पूर्व विधायकों की वापसी को लेकर जिलों से विरोध की बात सामने आई है।
कांग्रेस के भीतर उठ रहे इन सवालों से पार्टी के घर वापसी अभियान को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विरोध करने वाले नेताओं का तर्क है कि जब पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही थी, तब साथ छोड़ने वालों को दोबारा शामिल करने से उन कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो सकता है, जो लगातार पार्टी के साथ खड़े रहे।

बुरे वक्त में साथ छोड़ने वालों की वापसी पर सवाल
समीक्षा बैठक में जिलाध्यक्षों और प्रभारियों ने कथित तौर पर ऐसे नेताओं की वापसी पर असहमति जताई, जो बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। उनका सवाल है कि पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं को वापस लेने का क्या औचित्य है, खासकर तब जब पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता लगातार संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।
नर्मदापुरम और विदिशा के पूर्व विधायकों की वापसी को लेकर सामने आए विरोध ने इस मुद्दे को और महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि, संबंधित नेताओं की वापसी पर अंतिम फैसला क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

जीतू पटवारी की दो टूक—काम का देना होगा हिसाब
बैठक के दौरान पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने संगठन के कामकाज और प्रदर्शन को लेकर भी नेताओं को सख्त संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कुछ लोगों के साथ तस्वीरें खिंचवाकर भेजना संगठनात्मक काम का प्रमाण नहीं माना जा सकता। प्रदेश कार्यालय के पास कामकाज का रिकॉर्ड मौजूद है और सभी पदाधिकारियों को अपने काम के परिणाम दिखाने होंगे।
पटवारी के इस संदेश को संगठन की सक्रियता और जवाबदेही बढ़ाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

बीजेपी ने घर वापसी अभियान पर कसा तंज
कांग्रेस के भीतर उठ रहे विरोध के बीच बीजेपी ने भी इस मुद्दे पर निशाना साधा है। बीजेपी मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया ने दावा किया कि दो लाख से ज्यादा कार्यकर्ता कांग्रेस छोड़ चुके हैं। बीजेपी का कहना है कि जिन लोगों का कांग्रेस पर भरोसा नहीं रहा, उन्हें वापस लाने का अभियान सफल नहीं होगा।
हालांकि, बीजेपी की ओर से दिए गए दो लाख से अधिक कार्यकर्ताओं के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध नहीं है।

बृजगोपाल लोया, मीडिया प्रभारी, बीजेपी
कांग्रेस के सामने संगठन और सियासत की चुनौती
कांग्रेस के घर वापसी अभियान के सामने अब दोहरी चुनौती दिखाई दे रही है। एक ओर पार्टी को पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को वापस जोड़ने की कोशिश करनी है, तो दूसरी ओर उन नेताओं की नाराजगी भी दूर करनी होगी, जो मुश्किल वक्त में पार्टी के साथ खड़े रहे।
ऐसे में सवाल है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व घर वापसी का रास्ता आसान कर पाएगा या पार्टी के भीतर विरोध इस अभियान में बाधा बनेगा? अब सबकी नजरें जीतू पटवारी के अगले कदम और संगठन के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
फिलहाल, कांग्रेस में घर वापसी को लेकर असहमति ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
