सिवनी में अजब मामला : शिक्षक एक जगह कर रहा था नौकरी, दो जगह से मिलता रहा वेतन! 27 महीने में 21 लाख से ज्यादा भुगतान का आरोप

सिवनी।मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शिक्षक को कथित तौर पर 27 महीने तक दो अलग-अलग शिक्षा केंद्रों से वेतन भुगतान किया जाता रहा। आरोप है कि इस अवधि में 21 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान हुआ। मामला घंसौर और धनौरा शिक्षा केंद्र से जुड़ा बताया जा रहा है।
इस मामले के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक ही शिक्षक को दो अलग-अलग स्थानों से वेतन किस आधार पर दिया गया? क्या भुगतान के दौरान संबंधित दस्तावेजों और सेवा रिकॉर्ड की जांच की गई थी? यदि दोहरा भुगतान हुआ है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

एक जगह काम, दो जगह से वेतन भुगतान का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित शिक्षक एक ही स्थान पर कार्य कर रहा था, जबकि उसे घंसौर और धनौरा शिक्षा केंद्रों से वेतन भुगतान किए जाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि यह स्थिति करीब 27 महीने तक बनी रही। इस दौरान 21 लाख रुपये से अधिक के भुगतान का मामला सामने आया है।
हालांकि, दोहरे भुगतान की वास्तविक स्थिति, कुल राशि और भुगतान की प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित विभागीय दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

संकुल प्राचार्य के जवाब से उठे सवाल
मामले को लेकर जब धनौरा संकुल प्राचार्य से सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया कि संबंधित शिक्षक उनके यहां कार्यरत है और काम कर रहा है, इसलिए उसे वेतन दिया जा रहा है।
इसके बाद सवाल यह उठता है कि यदि शिक्षक घंसौर शिक्षा केंद्र में कार्यरत नहीं था, तो वहां से उसके वेतन का भुगतान किस आधार पर किया गया? क्या दोनों शिक्षा केंद्रों के रिकॉर्ड का मिलान किया गया था? यदि भुगतान में अनियमितता हुई, तो क्या संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी?

अधिकारियों की भूमिका की जांच जरूरी
बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी के पास दो महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी थी। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका थी और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
हालांकि, किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी और दोष तय करने के लिए दस्तावेजों की जांच तथा संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है।
21 लाख रुपये से अधिक की राशि की वसूली होगी?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकारी राशि को लेकर है। यदि जांच में दोहरा वेतन भुगतान और वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है, तो यह देखना होगा कि जिम्मेदारी किसकी तय होती है और नियमानुसार राशि की वसूली के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल, मामले में निष्पक्ष जांच, वेतन भुगतान के दस्तावेजों का सत्यापन और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और कथित दोहरे भुगतान की जिम्मेदारी किस पर तय होती है।
सिवनी से महेंद्र अग्रवाल की रिपोर्ट।
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
