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ट्रंप को बड़ा झटका : अपनी ही पार्टी के सांसदों ने छोड़ा साथ, ईरान युद्ध पर सीनेट में बढ़ा दबाव

admin

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May 20, 2026
04:41 AM
अपनी ही पार्टी के सांसदों ने छोड़ा साथ, ईरान युद्ध पर सीनेट में बढ़ा दबाव

नई दिल्ली। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उस समय बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उनकी ही रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने ईरान युद्ध के मुद्दे पर उनका साथ छोड़ दिया। अमेरिकी सीनेट में मंगलवार को हुए अहम मतदान में इन सांसदों ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर वोट दिया, जिससे ‘वॉर पावर्स एक्ट’ के तहत ट्रंप की शक्तियों को सीमित करने की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ गया। प्रस्ताव 50-47 मतों से पारित हुआ, जबकि तीन रिपब्लिकन सांसद वोटिंग में शामिल नहीं हुए।

ट्रंप के खिलाफ वोट देने वालों में केंटकी के सीनेटर Rand Paul, मेन की Susan Collins, अलास्का की Lisa Murkowski और लुइसियाना के Bill Cassidy शामिल रहे। वहीं डेमोक्रेट सांसद John Fetterman ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। राजनीतिक जानकार इस ‘क्रॉस वोटिंग’ को ट्रंप के लिए सार्वजनिक फटकार मान रहे हैं। आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति को उनकी पार्टी का पूरा समर्थन मिलता है, लेकिन ईरान युद्ध लंबा खिंचने के कारण अब पार्टी के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।

81 दिनों से जारी है युद्ध

28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब 81 दिन पार कर चुका है। खाड़ी क्षेत्र में अब तक 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि ऊर्जा ढांचे को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी प्रभावित हुआ है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, युद्ध पर अब तक करीब 29 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं।

‘वॉर पावर्स एक्ट’ बना विवाद की जड़

डेमोक्रेट्स का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन ने ‘वॉर पावर्स एक्ट’ का उल्लंघन किया है। इस कानून के अनुसार कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के 60 दिनों से अधिक समय तक सेना तैनात नहीं रख सकता। विपक्ष का दावा है कि यह समय सीमा 1 मई को खत्म हो चुकी थी। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि 8 अप्रैल को हुए युद्धविराम के बाद यह समयसीमा रुक गई थी।

आगे क्या होगा?

हालांकि सीनेट में प्रस्ताव पास होने के बावजूद ट्रंप को तुरंत सेना वापस बुलाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसके लिए सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा, जो फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत भी जारी है, लेकिन दोनों देशों की शर्तों में बड़ा अंतर बना हुआ है।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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