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भोजशाला विवाद पर कोर्ट में गरमाई बहस : मंदिर को लेकर मुस्लिम ने किया बड़ा दावा, प्रतिमा को लेकर भी उठे सवाल

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Apr 24, 2026
07:19 AM
मंदिर को लेकर मुस्लिम ने किया बड़ा दावा, प्रतिमा को लेकर भी उठे सवाल

इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में धार स्थित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर चल रही सुनवाई में गुरुवार को मुस्लिम पक्ष ने अपने तर्क विस्तार से रखे। अदालत में यह दावा किया गया कि उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों में कहीं भी यह प्रमाणित नहीं होता कि किसी विशेष मंदिर को तोड़कर वहां मस्जिद का निर्माण किया गया था।

यह सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच के समक्ष चल रही है। मामला भोजशाला परिसर के धार्मिक अधिकार और स्वरूप से जुड़ी याचिकाओं तथा एक रिट अपील से संबंधित है।

मुस्लिम पक्ष की ओर से सलमान खुर्शीद ने रखी दलील

मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने अदालत में दलील देते हुए कहा कि इतिहास में किसी निश्चित कालखंड में मंदिर को ध्वस्त कर उसी स्थान पर मस्जिद बनाए जाने का कोई पुख्ता साक्ष्य मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले का निर्णय भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों और कानूनी सिद्धांतों के आधार पर होना चाहिए।

प्रतिमा को लेकर भी उठे सवाल

खुर्शीद ने वर्ष 2003 के एक कथित पत्र का हवाला दिया, जिसमें ब्रिटिश हाई कमीशन द्वारा मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई थी। इसमें कहा गया कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस प्रतिमा को हिंदू पक्ष मां सरस्वती (वाग्देवी) की मूर्ति बता रहा है, वह वास्तव में जैन धर्म की देवी अंबिका की प्रतिमा है।

इतिहास के संदर्भ में भी दी गई दलील

अपने तर्कों में उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि धार, जो कभी मालवा की राजधानी रही, कई आक्रमणों और पुनर्निर्माण का केंद्र रहा है। उन्होंने अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति ऐन-उल-मुल्क मुल्तानी का उदाहरण देते हुए कहा कि 1305 में मालवा विजय के बाद अलग से धार को नष्ट करने की आवश्यकता नहीं पड़ी थी, क्योंकि शासन पहले ही स्थापित हो चुका था।

खुर्शीद ने यह भी स्पष्ट किया कि कमालुद्दीन चिश्ती से जुड़ी मस्जिद उस समय के शासकों द्वारा बनवाई गई थी, न कि किसी मंदिर को जबरन तोड़कर।

अब आगे क्या?

अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई सोमवार के लिए निर्धारित की है। इस संवेदनशील मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका फैसला ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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