नेपाल में कुदरत का प्रलय जारी! : 25 लाख घन मीटर पानी से फिर तबाही का खतरा, नदी का तेजी से बढ़ रहा जलस्तर, अगले कुछ घंटे बेहद अहम

नई दिल्ली। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से मची तबाही के बीच अब एक और बड़ी आफत का खतरा मंडरा रहा है। नेपाल-चीन सीमा के पास ग्यिरोंग सीमा चैकी के ऊपर ग्लेशियर टूटने से बनी झील अब ओवरफ्लो होने लगी है। चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक, झील का पानी किनारे से बाहर निकलना शुरू हो गया है और इसके साथ नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। पहले से बाढ़ की मार झेल रहे नेपाल में इस घटनाक्रम ने प्रशासन और बचाव दलों की चिंता बढ़ा दी है।
अगले डेढ़ घंटे बेहद अहम
झील से पानी निकलने की सूचना के बाद नेपाली सेना ने प्रभावित इलाके में राहत और बचाव अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया है। करीब डेढ़ घंटे तक अभियान रोककर हालात पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, इसलिए बचावकर्मियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता दी जा रही है।

झील में 25 लाख घन मीटर से ज्यादा पानी
चीनी इंजीनियरिंग टीम के सर्वे में सामने आया है कि झील में अब 25 लाख घन मीटर से अधिक पानी जमा हो चुका है। एक दिन पहले पानी की मात्रा करीब 15 से 20 लाख घन मीटर आंकी गई थी। यानी बेहद कम समय में झील में पानी की मात्रा तेजी से बढ़ी है।
चीन ने आशंका जताई थी कि अगले कुछ दिनों में झील में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी पहुंच सकता है। यह लगभग 1,200 ओलंपिक आकार के तैराकी तालाबों के बराबर है। इससे प्राकृतिक बांध टूटने का खतरा और बढ़ गया है।
चीन ने भी बचाव दल हटाए
खतरा बढ़ने के बाद चीन ने अपने बचावकर्मियों और वाहनों को प्रभावित क्षेत्र से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है। अधिकारियों को झील टूटने के साथ भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी दूसरी आपदाओं की भी आशंका है।
चीनी इंजीनियरों ने झील का हवाई सर्वे और त्रिआयामी मॉडल तैयार किया है। उनके मुताबिक झील करीब 150 मीटर लंबी और 40 से 50 मीटर गहरी है। खतरा कम करने के लिए प्राकृतिक बांध में निकासी मार्ग बनाने का विकल्प भी देखा जा रहा है, जिससे पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकाला जा सके।
त्रिशूली में भी हाई अलर्ट
नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद त्रिशूली क्षेत्र में पुलिस ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है। बचाव अभियान में लगे वाहनों को भी वापस बुलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि पानी का स्तर और बढ़ सकता है।
पहले ही भारी बाढ़ से तबाही झेल रहे नेपाल के लिए अब ग्लेशियर से बनी झील का बढ़ता पानी नई मुसीबत का संकेत बन गया है। आने वाला समय बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
