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पीएम मोदी ने सना तकाइची को बताया छोटी बहन : भारत-जापान रिश्तों का नया स्वर्णिम अध्याय, रक्षा, एआई-सेमीकंडक्टर और फार्मा क्षेत्र में बड़े समझौते

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 02, 2026
09:18 AM
भारत-जापान रिश्तों का नया स्वर्णिम अध्याय, रक्षा, एआई-सेमीकंडक्टर और फार्मा क्षेत्र में बड़े समझौते

नई दिल्ली। जापान की प्रधानमंत्री सना तकाइची इन दिनों भारत के दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान सैनिकों के दल ने संगीत की मनमोहन प्रस्तुति भी दी। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच 16वीं भारत-जापान वार्षि शिखर वार्ता हुई। इस अहम बैठक में भारत और जापान ने अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है।

हैदराबाद हाउस में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के बीच रक्षा, फार्मास्युटिकल, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), निवेश और सप्लाई चेन जैसे अहम क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। पीएम मोदी और सना तकाइची की कई मेमोरेंडम ऑफ कोऑपरेशन (एमओसी) पर हस्ताक्षर हुए। इस दौरान दोनों नेताओं ने भविष्य की साझेदारी का व्यापक रोडमैप भी पेश किया।

मेरी छोटी बहन कहकर किया स्वागत

खास बात यह रही की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री सना तकाइची का बेहद आत्मीय अंदाज में स्वागत किया। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री तकाइची, मेरी छोटी बहन, दोनों देशों के प्रतिनिधियों और मीडिया के साथियों का मैं स्वागत करता हूं। भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए उनकी पहली भारत यात्रा पर मुझे बेहद खुशी है।

पीएम मोदी ने कहा कि सना तकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं और एक दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जापान का नारा प्रांत भारत और जापान की साझा बौद्ध विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जो दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाता है।

विश्वास ही सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत और जापान का रिश्ता भरोसे की मजबूत नींव पर टिका है। उन्होंने कहा कि हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन में भी उन्होंने कहा था कि मौजूदा दौर में आपसी विश्वास ही सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है और भारत-जापान की साझेदारी इस कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है।

उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में जापान ने भारत के विकास में अहम योगदान दिया है। अब दोनों देश भविष्य की तकनीकों और नई अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में भी मिलकर काम करेंगे।

रक्षा से लेकर एआई तक बढ़ेगा सहयोग

शिखर वार्ता के दौरान दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई। इसके अलावा फार्मास्युटिकल, सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती तकनीकों, निवेश, सप्लाई चेन और औद्योगिक सहयोग को नई गति देने का फैसला किया गया। दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की अपनी साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान का रिश्ता केवल व्यापार या निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों, पारस्परिक विश्वास और साझा रणनीतिक हितों पर आधारित है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों की यह नई साझेदारी आने वाले वर्षों में न सिर्फ भारत और जापान के विकास को नई दिशा देगी, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता, समृद्धि और वैश्विक संतुलन को भी मजबूत बनाएगी।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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