दतिया उपचुनाव: : आज शाम के बाद बाहरी नेताओं की नो एंट्री, डोर-टू-डोर संपर्क पर रहेगा फोकस

दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार मंगलवार शाम पांच बजे थम जाएगा। इसके साथ ही बाहरी नेताओं और स्टार प्रचारकों की चुनावी सभाओं एवं रैलियों पर पूर्ण विराम लग जाएगा। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार प्रचार समाप्त होने के बाद केवल प्रत्याशी और उनके स्थानीय कार्यकर्ता ही घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर सकेंगे। अब सभी राजनीतिक दलों का पूरा ध्यान 30 जुलाई को होने वाले मतदान में अधिक से अधिक मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने पर रहेगा।
2.20 लाख मतदाता करेंगे जनादेश का फैसला
30 जुलाई को होने वाले मतदान में कुल 2 लाख 20 हजार 344 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1 लाख 16 हजार 88 पुरुष, 1 लाख 4 हजार 246 महिला और 10 अन्य मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा विधानसभा क्षेत्र में 1,372 दिव्यांग, 80 वर्ष से अधिक आयु के 1,237 वरिष्ठ नागरिक तथा 443 सर्विस वोटर भी हैं। सभी मतदाता इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के माध्यम से 21 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। ईवीएम में प्रत्याशियों के साथ ‘नोटा’ का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। मतदान के बाद मतों की गिनती 3 अगस्त को होगी।
भाजपा ने विकास के मुद्दे पर मांगे वोट
भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान दतिया के विकास को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले ढाई वर्षों में क्षेत्र में विकास कार्यों की गति थम गई है। भाजपा ने मतदाताओं से वादा किया कि यदि पार्टी प्रत्याशी को जीत मिलती है तो अधूरे और रुके हुए विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने सभाओं और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की।
कांग्रेस ने भाजपा और नरोत्तम मिश्रा को बनाया निशाना
वहीं कांग्रेस ने अपने चुनाव प्रचार में भाजपा के साथ पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को मुख्य मुद्दा बनाया। कांग्रेस नेताओं ने उनके कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था और कथित गुंडागर्दी के मामलों को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए। साथ ही नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटे जाने को भी चुनावी मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस ने इसे भाजपा की आंतरिक राजनीति का परिणाम बताया। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, हेमंत कटारे और जयवर्धन सिंह सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने लगातार जनसभाएं और नुक्कड़ सभाएं कर कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया।
जातीय समीकरण साधने में दोनों दलों ने झोंकी ताकत
दतिया उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने करीब 40-40 स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारा। भाजपा ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और ग्वालियर-चंबल अंचल के नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी, जबकि कांग्रेस ने भी अपने वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न वर्गों और समुदायों तक पहुंचने की जिम्मेदारी दी। दोनों दलों ने जातीय और स्थानीय समीकरणों को साधने के लिए पूरी ताकत झोंक दी।
मंगलवार शाम पांच बजे प्रचार समाप्त होते ही बाहर से आए सभी नेताओं को दतिया विधानसभा क्षेत्र छोड़ना होगा। इसके बाद केवल स्थानीय कार्यकर्ता और प्रत्याशी ही मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क कर सकेंगे। अब चुनावी मुकाबला पूरी तरह बूथ प्रबंधन और मतदाता संपर्क पर केंद्रित रहेगा। 30 जुलाई को मतदान के साथ ही 21 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद हो जाएगा और 3 अगस्त को मतगणना के बाद यह स्पष्ट होगा कि दतिया की जनता ने किसे अपना जनप्रतिनिधि चुना है।
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