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निशातपुरा में अतिक्रमण पर प्रहार : हाईकोर्ट का आदेश पर 11 मकानों पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 35 साल पुराना कब्जा साफ

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Aug 18, 2026
01:04 PM
हाईकोर्ट का आदेश पर 11 मकानों पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 35 साल पुराना कब्जा साफ

भोपाल। निशातपुरा में मंगलवार को प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ जोरदार कार्रवाई करते हुए वर्षों पुराने कब्जे पर बुलडोजर चला दिया। उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच चार पोकलेन मशीनों से 11 पक्के मकानों को ढहा दिया गया। करीब 0.75 एकड़ निजी जमीन पर इन निर्माणों को लंबे समय से कब्जे में बताया जा रहा था। कार्रवाई शुरू होते ही इलाके में हलचल बढ़ गई। प्रशासनिक अमले ने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेश के दायरे में आने वाले और बिना स्थगनादेश वाले निर्माणों को ही हटाया गया है। कार्रवाई के दौरान किसी बड़े विरोध की सूचना नहीं है।

0.75 एकड़ निजी जमीन पर था कब्जा

प्रशासन के अनुसार, निशातपुरा में करीब 0.75 एकड़ जमीन अविनाश जौहरी के स्वामित्व में है। इस जमीन पर लंबे समय से कब्जा कर मकान बनाए गए थे। इनमें कुछ मकान तीन मंजिला तक बनाए जाने की जानकारी सामने आई। प्रशासन का कहना है कि जमीन पर अवैध कब्जे के साथ पक्के निर्माण भी कर लिए गए थे। जमीन की रजिस्ट्री कराए जाने की बात भी सामने आई है।

भू-स्वामी पहुंचा हाईकोर्ट, मिला कार्रवाई का रास्ता

जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के लिए भू-स्वामी ने उच्च न्यायालय की शरण ली थी। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने भोपाल जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन निर्माणों पर किसी प्रकार का स्थगनादेश लागू नहीं है, उन्हें हटाया जा सकता है। इसी आदेश के आधार पर मंगलवार को प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और कार्रवाई शुरू की।

पहले विरोध से रुक गई थी कार्रवाई

कार्रवाई का नेतृत्व बैरागढ़ के उपजिलाधिकारी रवीश कुमार श्रीवास्तव और तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह ने किया। अधिकारियों के मुताबिक, इससे पहले भी जमीन खाली कराने का प्रयास किया गया था, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी थी। इस बार प्रशासन ने पर्याप्त पुलिस बल के साथ कार्रवाई की और बिना किसी बड़े विरोध के 11 मकानों को हटाया गया।

सरकारी जमीन पर अभी नहीं चला बुलडोजर

निजी जमीन से लगी करीब 0.3 एकड़ सरकारी जमीन पर भी अतिक्रमण की बात सामने आई है। हालांकि, इसके कुछ हिस्से पर उच्च न्यायालय का स्थगनादेश लागू है। इसलिए प्रशासन ने वहां फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मंगलवार की कार्रवाई केवल उन्हीं निर्माणों तक सीमित रही, जिन पर अदालत की ओर से कोई स्थगनादेश नहीं था।

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