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US-Iran War Impact on Pakistan : : बूंद-बूंद तेल के लिए तरस रहा पाकिस्तान,पीएम शहबाज शरीफ ने सुनाई अपनी व्यथा

नीरज द्विवेदी

नीरज द्विवेदी

Apr 30, 2026
07:19 AM
बूंद-बूंद तेल के लिए तरस रहा पाकिस्तान,पीएम शहबाज शरीफ ने सुनाई अपनी व्यथा

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है, और इसका सीधा असर पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देशों पर दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने चेतावनी दी है कि पिछले दो वर्षों में देश ने जो भी आर्थिक स्थिरता हासिल की थी, वह अब खतरे में पड़ गई है।

तेल आयात बिल में भारी उछाल

मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में प्रधानमंत्री शरीफ़ ने खुलासा किया कि संघर्ष से पहले पाकिस्तान का साप्ताहिक तेल आयात बिल लगभग 300 मिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। यह वृद्धि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव डाल रही है और पहले से ही नाजुक अर्थव्यवस्था को संकट की स्थिति में पहुँचा रही है।

इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जो प्रतिदिन वैश्विक तेल कीमतों और आपूर्ति की स्थिति पर नजर रख रही है।

कूटनीतिक प्रयास और सीमित सफलता

पाकिस्तान ने इस संकट को कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री शरीफ़ के अनुसार, 11 अप्रैल से इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता आयोजित की गई, जो लगातार 21 घंटे तक चली। हालांकि, इन वार्ताओं से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।

फिलहाल एक अस्थायी संघर्ष-विराम लागू है, और पाकिस्तान दूसरे दौर की वार्ता की मेजबानी करने की योजना बना रहा है। शरीफ़ ने इन प्रयासों में आसिम मुनीर और इशाक डार की भूमिका की सराहना की।

वैश्विक तेल बाजार पर असर

अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरान पर लगाए गए नौसैनिक नाकाबंदी के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 7.6 प्रतिशत बढ़कर 119.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस नाकाबंदी को सैन्य कार्रवाई से भी अधिक प्रभावी बताया है, जिससे ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया है।

वैश्विक गरीबी पर बढ़ता खतरा

इस संघर्ष के व्यापक प्रभाव को लेकर United Nations Development Programme ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। संस्था के अनुसार, युद्ध और बढ़ती महंगाई के चलते 160 देशों में 30 मिलियन से अधिक लोग अत्यधिक गरीबी के दायरे में आ सकते हैं।

UNDP प्रमुख अलेक्जेंडर डी क्रू ने इस स्थिति को “रिवर्स डेवलपमेंट” यानी विकास की प्रक्रिया के उलट जाने की संज्ञा दी है।

नीरज द्विवेदी
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नीरज द्विवेदी

5 साल से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव। टीवी और प्रिंट मीडिया में कलमकारी की है। पॉलिटिकल और पब्लिक कनेक्ट की खबरों में दिलचल्पी। TV27NEWS DIGITAL में एंकरिंग भी कर रहे हैं।

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