शनिवार, 9 मई 202612:50:38 PM
Download App
Home/देश

टीम शुभेंदु में जातीय समीकरणों का मास्टरस्ट्रोक? : भाजपा की रणनीत से हैरान राजनीतिक विश्लेषक

admin

admin

May 09, 2026
10:27 AM
भाजपा की रणनीत से हैरान राजनीतिक विश्लेषक

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सियासी इतिहास में भाजपा ने पहली बार सरकार बना ली है। कभी ममता बनर्जी के करीबी रहे शुभेंदु अधिकारी ने उनके किले को ध्वस्त कर राज्य में कमल खिलाया। इतना नहीं, भाजपा ने उन्हें ईनाम देते हुए राज्य की कमान भी सौंप दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित बीजेपी के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। टीम शुभेंदु में ब्राम्हण, मतुआ से लेकर राजवंशी तक की सोशल इंजीनियरिंग देखने को मिली है।

सोशल इंजीनियरिंग का बढ़ता राजनीतिक मॉडल

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में बीजेपी की रणनीति जातीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है। इसका उद्देश्य विभिन्न समुदायोंकृजैसे भद्रलोक, ओबीसी, एससी-एसटी और अल्पसंख्यक समूहोंकृके बीच अपनी पकड़ मजबूत करना बताया जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह वही मॉडल है जो उत्तर भारत के कुछ राज्यों में “सोशल इंजीनियरिंग” के रूप में देखा गया है, जहां अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देकर व्यापक वोट आधार तैयार करने की कोशिश की जाती है।

मतुआ और राजवंशी समुदायों पर फोकस

उत्तर और दक्षिण 24 परगना तथा नदिया क्षेत्रों में मतुआ समुदाय का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। राजनीतिक दल इस समुदाय को नागरिकता, विकास और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों से जोड़कर देख रहे हैं। इसी तरह उत्तर बंगाल के राजवंशी समुदाय की भूमिका भी कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में अहम मानी जाती है। विश्लेषण यह भी बताता है कि इन क्षेत्रों में विकास और पहचान की राजनीति मिलकर चुनावी समीकरण तय करती है।

जंगलमहल और आदिवासी राजनीति

पुरुलिया, बांकुरा और झाड़ग्राम जैसे क्षेत्रों में आदिवासी आबादी का प्रभाव है। यहां रोजगार, जमीन और विकास के मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। राजनीतिक दल इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए आदिवासी नेतृत्व और स्थानीय प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाते हैं।

महिला और शहरी वोट बैंक की भूमिका

शहरी क्षेत्रों में महिला मतदाता और मध्यम वर्ग की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इस वर्ग को साधने के लिए राजनीतिक दल महिला नेतृत्व और विकास आधारित नीतियों को प्रमुखता देते हैं। यह रणनीति विशेष रूप से कोलकाता और औद्योगिक क्षेत्रों में प्रभावी मानी जाती है।

क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक संदेश

बंगाल की राजनीति में उत्तर-दक्षिण, शहरी-ग्रामीण और जातीय संतुलन हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। राजनीतिक दल यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि वे केवल किसी एक क्षेत्र या वर्ग की पार्टी नहीं हैं, बल्कि पूरे राज्य के प्रतिनिधित्व का दावा रखते हैं।

राजनीति में बदलता फोकस

कुल मिलाकर, “टीम शुभेंदु” को लेकर चल रही चर्चाएं वास्तविक सत्ता परिवर्तन से अधिक राजनीतिक रणनीति और सामाजिक समीकरणों के विश्लेषण से जुड़ी हैं। बंगाल की राजनीति में अब केवल दलगत संघर्ष नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व और पहचान की राजनीति भी निर्णायक भूमिका निभा रही है।

admin
Written By

admin

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें