दिल्ली एयर पाॅल्यूशन : सर्दियों की तैयारी गर्मी में ही शुरू, सरकार ने जून में जारी किया प्रोडक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क

नई दिल्ली। सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार ने अभी से व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार ने ‘प्रोडक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क’ को जून में ही अधिसूचित कर दिया है, ताकि सभी संबंधित विभागों, उद्योगों, संस्थानों और नागरिकों को पहले से तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नवंबर से शुरू होने वाले प्रदूषण के पीक सीजन में दिल्लीवासियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। यह व्यवस्था सामान्यतः हर वर्ष 1 नवंबर से 28 फरवरी तक ग्रैप के साथ लागू रहती है।
वाहनों और ईंधन नियमों पर सख्ती, पीयूसीसी अनिवार्य
सीएमओ द्वारा साझा जानकारी के अनुसार, वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) वाले वाहनों को ही पेट्रोल पंपों पर ईंधन दिया जाएगा। इसके अलावा 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली में गैर-बीएस-4 कमर्शियल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि, सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन, आपातकालीन सेवाएं और सरकारी कार्यों से जुड़े वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।
निर्माण कार्यों और धूल नियंत्रण पर कड़ी निगरानी
प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल निर्माण गतिविधियों पर भी सख्त नियम लागू किए जाएंगे। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक सभी निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्यों में धूल नियंत्रण के मानकों का पालन अनिवार्य होगा। इसके साथ ही 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। बड़े निर्माण स्थलों और ऊंची इमारतों पर एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट सप्रेशन सिस्टम लगाना अनिवार्य किया जाएगा, ताकि हवा में मौजूद धूल कणों को नियंत्रित किया जा सके।
ड्रोन और मॉनिटरिंग से होगी निगरानी, दोगुना होगा पार्किंग शुल्क
सरकार ने यह भी तय किया है कि खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और इसके लिए ड्रोन तथा फील्ड मॉनिटरिंग का उपयोग किया जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण नियमों के उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना करने का निर्णय लिया गया है, ताकि निजी वाहनों के उपयोग को नियंत्रित किया जा सके।
वर्क फ्रॉम होम और समय में बदलाव की भी संभावना
जरूरत पड़ने पर सरकारी और निजी कार्यालयों के समय में बदलाव किया जा सकता है। साथ ही 50 प्रतिशत कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने जैसी व्यवस्था भी लागू की जा सकती है, जिससे सड़कों पर भीड़ और प्रदूषण के दबाव को कम किया जा सके।
सरकार का दावाः समय रहते तैयारी ही सबसे बड़ा हथियार
सीएमओ ने कहा कि प्रदूषण से लड़ाई का सबसे प्रभावी तरीका समय रहते तैयारी करना है। इसी सोच के साथ दिल्ली सरकार ने सभी जरूरी कदमों को ‘मिशन मोड’ में लागू करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है, ताकि सर्दियों में वायु गुणवत्ता को बेहतर रखा जा सके।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
