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दतिया में भावनात्मक मोड़ : तलाक के 10 साल बाद फिर साथ आया परिवार, सखी सेंटर की पहल बनी मिसाल

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 19, 2026
09:59 AM
तलाक के 10 साल बाद फिर साथ आया परिवार, सखी सेंटर की पहल बनी मिसाल

भोपाल/दतिया। महिलाओं की सहायता के लिए संचालित वन स्टॉप सेंटर (सखी) एक बार फिर मानवीय संवेदनशीलता और पुनर्मिलन की मिसाल बनकर सामने आया है। दतिया जिले में 10 साल पहले कानूनी रूप से अलग हुए एक दंपति को काउंसलिंग और समझाइश के जरिए फिर से एक परिवार के रूप में जोड़ दिया गया। इस पहल से न सिर्फ दो बेटियों को उनका पिता मिला, बल्कि टूटे रिश्ते में भी नई उम्मीद जगी है।

यह मामला दतिया की 36 वर्षीय महिला (बदला हुआ नाम उर्मिला) से जुड़ा है, जिनका 10 साल पहले अदालत के आदेश से तलाक हो चुका था। तलाक के बाद वह अपनी दो बेटियों के साथ मायके में रह रही थीं। उनके वृद्ध पिता मजदूरी कर किसी तरह परिवार का खर्च चला रहे थे, लेकिन बढ़ती महंगाई और उम्र के कारण हालात लगातार कठिन होते जा रहे थे।

जनसुनवाई से शुरू हुआ समाधान का रास्ता

परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित उर्मिला ने दतिया कलेक्टर की जनसुनवाई में आवेदन दिया। इसके बाद मामला महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से वन स्टॉप सेंटर (सखी) तक पहुंचा, जहां तुरंत काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की गई। वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक और टीम ने उर्मिला की स्थिति को गंभीरता से समझते हुए उन्हें भावनात्मक और मानसिक सहारा दिया। महिला ने अपनी सबसे बड़ी चिंता जताई कि इतने वर्षों बाद क्या उनका पूर्व पति और उसका परिवार उन्हें स्वीकार करेगा और बच्चों की जिम्मेदारी लेगा या नहीं।

काउंसलिंग में सामने आई कानूनी और भावनात्मक जटिलता

काउंसलिंग के दौरान पति ने तलाक से जुड़े कानूनी दस्तावेज भी प्रस्तुत किए, जिससे स्पष्ट था कि रिश्ता औपचारिक रूप से समाप्त हो चुका था। हालांकि वन स्टॉप सेंटर की टीम ने मामले को केवल कानूनी दृष्टि से नहीं देखा, बल्कि मानवीय पहलू पर जोर दिया। टीम ने संयुक्त काउंसलिंग के जरिए पति और उसके परिवार को बच्चों की शिक्षा, पालन-पोषण और भविष्य की जिम्मेदारी को लेकर संवेदनशील बनाया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से लगातार संवाद स्थापित किया गया।

समझाइश से बदला नजरिया, फिर जुड़ा परिवार

लगातार संवाद और समझाइश का असर यह हुआ कि पति और उसके परिवार ने स्थिति पर पुनर्विचार किया। उन्होंने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए उर्मिला और दोनों बेटियों को स्वीकार करने पर सहमति जताई। साथ ही बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण की जिम्मेदारी उठाने का भी आश्वासन दिया।

नई शुरुआत की ओर बढ़ा परिवार

कई दिनों की काउंसलिंग के बाद वह क्षण आया जब 10 साल से अलग रह रहा परिवार फिर से एक साथ नजर आया। भावनात्मक माहौल में सभी ने एक-दूसरे का हाथ थामा और नए सिरे से जीवन शुरू करने का फैसला किया। उर्मिला ने इस पहल के लिए वन स्टॉप सेंटर और प्रशासन का आभार जताया। यह घटना न केवल एक परिवार के पुनर्मिलन की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और संवेदनशील प्रयासों से टूटे रिश्तों में भी नई शुरुआत संभव है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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