TMC में इस्तीफों की झड़ी : दो वरिष्ठ नेताओं ने छोड़े अहम पद, नेताओं के कदम से गहराया नेतृत्व संकट

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का अंदरूनी संकट लगातार गहराता जा रहा है। शुक्रवार को पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा, जब दो वरिष्ठ नेताओं ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पद छोड़ दिए, जबकि उत्तर बंगाल के प्रमुख नेता गौतम देब ने सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर पद से इस्तीफा सौंप दिया। लगातार हो रहे इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
ज्योतिप्रिय मलिक ने अपने इस्तीफे की वजह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही है। बढ़ा हुआ ब्लड शुगर और किडनी से जुड़ी बीमारी के कारण वे पार्टी की जिम्मेदारियां निभाने की स्थिति में नहीं हैं। उनका कहना है कि जब सक्रिय रूप से काम नहीं किया जा सकता तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें नई वर्किंग कमेटी में शामिल किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर लिया।
राशन घोटाला और लंबी कानूनी लड़ाई
मलिक का नाम वर्ष 2023 में सामने आए कथित राशन वितरण घोटाले में चर्चा में आया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें अक्टूबर 2023 में गिरफ्तार किया था और करीब 15 महीने बाद जनवरी 2025 में उन्हें जमानत मिली। गिरफ्तारी के दौरान उन्होंने कई बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन पर भरोसा कायम रखा और चुनाव में उन्हें उम्मीदवार भी बनाया था।
गौतम देब ने भी छोड़ा मेयर पद
उत्तर बंगाल के प्रभावशाली नेता गौतम देब ने भी सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी। उन्होंने अपना इस्तीफा नगर निगम आयुक्त को सौंपने के साथ सरकारी वाहन और सुरक्षा भी वापस कर दी। माना जा रहा है कि उनका यह फैसला पार्टी के भीतर चल रहे बदलावों के बीच महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
लगातार इस्तीफों से बढ़ी टीएमसी की मुश्किलें
टीएमसी में पिछले कुछ दिनों से लगातार नेताओं के इस्तीफे सामने आ रहे हैं। इससे पहले कई वरिष्ठ नेता और स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधि भी अपने पद छोड़ चुके हैं। विभिन्न जिलों के नगर निकायों और पंचायतों के अध्यक्षों तथा प्रधानों के इस्तीफों ने संगठन में असंतोष की तस्वीर साफ कर दी है। चुनावी हार के बाद बढ़ती नाराजगी और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने ममता बनर्जी की पार्टी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।
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