Raisen news : 98 करोड़ की हलाली जलप्रदाय योजना पर सवाल, नरखेड़ा में खुले चैंबर और लीकेज से ग्रामीण परेशान

Raisen News: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में जल जीवन मिशन के तहत बनाई जा रही हलाली समूह जलप्रदाय योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। करीब 98.72 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का उद्देश्य 61 गांवों तक पानी पहुंचाना है, लेकिन जमीनी स्तर पर ग्रामीणों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कहीं लोग पानी की नियमित आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं, तो कहीं पाइपलाइन में लीकेज, अधूरे निर्माण कार्य और सड़क किनारे बने खुले चैंबर परेशानी का कारण बन रहे हैं। नरखेड़ा गांव में ग्रामीणों ने निर्माण कंपनी पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
खुले चैंबर में गिरी सरपंच की कार, नुकसान का आरोप
रायसेन जिले के नरखेड़ा में सरपंच रामदयाल लोधी ने हलाली समूह जलप्रदाय योजना के निर्माण कार्य पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क किनारे बनाए गए बड़े चैंबर खुले पड़े हैं, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है। सरपंच के मुताबिक, बीते दिनों उनकी कार एक खुले चैंबर में गिर गई, जिससे वाहन को नुकसान पहुंचा।
उनका कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन इसके बावजूद संबंधित स्थान पर सुधार नहीं हुआ। सड़क किनारे खुले चैंबर ग्रामीणों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का ध्यान रखने और खुले चैंबरों को तत्काल ढकने की मांग की है।
पाइपलाइन में लीकेज, सड़कों पर बह रहा पानी
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में बिछाई गई पाइपलाइन कई जगहों पर कम गहराई में डाली गई है। इसके कारण वाहनों की आवाजाही से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने और पानी का रिसाव होने की समस्या सामने आ रही है। जगह-जगह लीकेज के कारण सड़कें पानी से भर रही हैं, जबकि दूसरी ओर घरों तक पानी की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो फिर उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान क्यों होना पड़ रहा है? यदि पाइपलाइन बिछाने और चैंबर निर्माण के दौरान गुणवत्ता और सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया, तो योजना का लाभ आम लोगों तक पहुंचाना मुश्किल होगा।
61 गांवों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य, फिर भी परेशानी
हलाली समूह जलप्रदाय योजना के तहत भोपाल जिले के 36 और रायसेन जिले के 25 गांवों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। इस तरह कुल 61 गांवों को योजना से जोड़ने की बात कही गई थी। योजना को वर्ष 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया था, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2026 में भी कई गांवों में पानी की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। ऐसे में निर्माण कार्य में देरी, पाइपलाइन लीकेज और खुले चैंबर जैसी समस्याएं परियोजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर रही हैं।
निर्माण कंपनी की जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?
नरखेड़ा में सामने आई समस्याओं के बाद अब सवाल जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी और निर्माण कंपनी की जवाबदेही को लेकर उठ रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि खुले चैंबरों को सुरक्षित किया जाए, लीकेज की मरम्मत हो और पाइपलाइन की गुणवत्ता की जांच कराई जाए, ताकि लोगों को नियमित पेयजल मिल सके।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन शिकायतों पर कब संज्ञान लेता है और ग्रामीणों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। करीब 98.72 करोड़ रुपये की इस योजना का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब गांवों तक सुरक्षित और नियमित पेयजल पहुंचेगा।
लोकेशन: रायसेन, मध्य प्रदेश
रिपोर्टर: अजय गोहिल
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
