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दिल्लीवासियों को जून में लगेगा बिजली बिल का झटका : नियामक आयोग के फैसले से 500 यूनिट से ज्यादा खर्च करने वाले उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 13, 2026
08:46 AM
नियामक आयोग के फैसले से 500 यूनिट से ज्यादा खर्च करने वाले उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ

नई दिल्ली। दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को जून महीने में महंगाई का बड़ा झटका लगने जा रहा है। दिल्ली बिजली नियामक आयोग ने शनिवार को तीनों बिजली कंपनियों को कंपनियों-बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड-को अप्रैल 2026 के लिए पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज वसूलने की अनुमति दे दी है। इसके लागू होने से बिजली की अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को जून महीने में महंगाई का झटका लगना तय है।

यह दिल्ली में पहला मासिक पीपीएसी है। पहले यह हर तीन महीने में होता था. ऐसे में राजधानी में बिजली एक से 3.30 फीसदी महंगी हो सकती है। अब हर महीने बिजली की दरों की समीक्षा होगी. कहा जा रहा है कि 500 यूनिट से ज्यादा खर्च करने पर बढ़ा बिल आएगा। हालांकि इसका 200-400 यूनिट खर्च करने वालों पर असर नहीं पड़ेगा। आयोग का कहना है कि बिजली उत्पादन लागत में लगातार बदलाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। कोयले और अन्य ईंधनों की कीमत बढ़ने से बिजली खरीद महंगी हो गई है, जिसका बोझ अब उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

कंपनियों को अलग-अलग दरों पर मंजूरी

डीईआरसी ने बिजली वितरण कंपनियों को अलग-अलग पीपीएसी दरों की अनुमति दी है। बीआरपीएल को 17.94 प्रतिशत, बीवाईपीएल को 17.43 प्रतिशत और टीपीडीडीएल को 16 प्रतिशत तक चार्ज लगाने की अनुमति दी गई है। हालांकि आयोग ने कंपनियों द्वारा मांगी गई दरों से कम दरें मंजूर की हैं, जिससे कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

सब्सिडी लेने वालों को राहत, बाकी उपभोक्ता प्रभावित

दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना के तहत 200 से 400 यूनिट और 500 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि उनकी सब्सिडी यूनिट खपत पर आधारित होती है। हालांकि 500 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को अब 7 से 18 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ सकता है, जिससे उनके बिल पहले की तुलना में काफी बढ़ जाएंगे।

नया नियम और भविष्य की वसूली व्यवस्था

आयोग ने ‘नियम एफ’ भी लागू किया है, जिसके तहत यदि किसी महीने की वसूली पूरी नहीं हो पाती है तो उसे अगले महीनों में धीरे-धीरे समायोजित किया जाएगा। इससे बिजली कंपनियों को समय पर भुगतान करने में मदद मिलेगी और उन पर ब्याज का अतिरिक्त बोझ भी कम होगा। हालांकि उपभोक्ताओं के लिए यह व्यवस्था लंबे समय में बिल को और महंगा बना सकती है।

बढ़ती बिजली लागत से बढ़ी चिंता

बढ़ती उत्पादन लागत और ईंधन कीमतों के कारण यह फैसला जरूरी बताया जा रहा है, लेकिन इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। जून में आने वाले बिजली बिलों में यह बढ़ोतरी साफ तौर पर दिखाई दे सकती है, जिससे दिल्ली के उच्च खपत वाले उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और झटका लगेगा।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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