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झारखंड छात्र आंदोलन : सिबू सोरेन को याद देवेन्द्र महतो ने हेमंत को लिया निशाने पर, कहा- जोखिम के बाद भी आया आंदोलन में

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 10, 2026
08:55 AM
सिबू सोरेन को याद देवेन्द्र महतो ने हेमंत को लिया निशाने पर, कहा- जोखिम के बाद भी आया आंदोलन में

रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को उग्र हो गया। विधानसभा घेराव के लिए निकले हजारों अभ्यर्थियों ने पीछे के रास्तों से आगे बढ़ते हुए विधानसभा की दीवार तक पहुंच गए। इससे राजधानी में तनाव की स्थिति बन गई।इस मार्च में पिछले 9दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेन्द्र महतो भी शामिल हुए। उन्हें एंबुलेंस से मार्च स्थल तक लाया गया और बाद में स्ट्रेचर पर आगे ले जाया गया। इस दौरान उन्होंने सीएम हेमंत सोरेन को अपने निशाने पर लिया। महतो ने कहा कि अगर ‘गुरुजी’ आज जीवित होते तो छात्रों के इस आंदोलन में उनके साथ खड़े होते।

‘जोखिम के बावजूद आंदोलन में आया हूं’

विधानसभा घेराव मार्च के दौरान देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि वह अपनी जान जोखिम में डालकर आंदोलन में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा, मैं जानता हूं कि मैं दौड़ नहीं सकता। पुलिस की ओर से आंसू गैस के गोले भी छोड़े जा सकते हैं। इसके बावजूद मैं यहां आया हूं।” उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता छात्रों की मांगों को सरकार तक पहुंचाना है। महतो ने स्पष्ट किया कि सरकार जब तक छात्रों की मांगें नहीं मानती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

देवेंद्र नाथ महतो ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “गुरुजी शिबू सोरेन ने पूरी जिंदगी संघर्ष किया और पूरी जिंदगी आंदोलनों का नेतृत्व किया। अगर आज वह हमारे बीच होते तो हमारे आंदोलन में जरूर शामिल होते।” उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन अब उनके बीच नहीं हैं, लेकिन आंदोलन में उनकी तस्वीर साथ रखी गई है। महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जिक्र करते हुए कहा कि यदि हेमंत सोरेन शिबू सोरेन को अपना आदर्श मानते हैं, तो उन्हें छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

एंबुलेंस से पहुंचे, स्ट्रेचर पर मार्च में हुए शामिल

लगातार नौ दिनों की भूख हड़ताल के कारण देवेंद्र नाथ महतो काफी कमजोर हो गए हैं। यही वजह है कि उन्हें एंबुलेंस के जरिए जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से विधानसभा की ओर लाया गया। इसके बाद छात्रों ने उन्हें स्ट्रेचर पर आगे बढ़ाया। महतो के मार्च में शामिल होने के दौरान छात्रों में भी खास उत्साह देखने को मिला। प्रदर्शनकारी छात्रों ने उनके समर्थन में नारे लगाए और उन्हें अपने साथ लेकर विधानसभा की ओर बढ़ते रहे।

सरकार बोली- शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति

झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि अभ्यर्थियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की पूरी अनुमति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ छर्रे वाली बंदूक, आंसू गैस या लाठीचार्ज का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। मंत्री के मुताबिक, पिछले चार दिनों से छात्रों के साथ कई दौर की बातचीत हुई है और सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली लगभग सभी मांगों पर सहमत हो चुकी है।

हालांकि, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग पर सरकार ने स्पष्ट किया कि इस मामले में न्यायिक निर्देश जुड़े हुए हैं। इसलिए राज्य सरकार अपने स्तर पर परीक्षा रद्द करने का फैसला नहीं कर सकती।

जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार का दावा

सरकार ने कहा कि मामले की जांच खुली है और न्यायिक निगरानी में जांच कराने के लिए भी सरकार तैयार है। कथित धन के दुरुपयोग की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय को भी आमंत्रित किए जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही भर्ती व्यवस्था में बड़े सुधार की तैयारी का दावा किया गया है। सरकार ने भारतीय प्रबंधन संस्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, एक्सएलआरआई और भारतीय खनन विद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल कर एक विशेषज्ञ समिति बनाने का प्रस्ताव रखा है।

फिलहाल छात्रों का आक्रोश और सरकार के आश्वासन आमने-सामने हैं। विधानसभा घेराव के बीच अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बातचीत से गतिरोध टूटता है या छात्रों का आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेता है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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