अब दो बच्चों की प्रासंगिकता खत्म : चुनाव लड़ने की पाबंदी पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली। दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि देश में लगातार घट रही प्रजनन दर और बदलती जनसांख्यिकीय परिस्थितियों को देखते हुए ऐसे कानूनों की प्रासंगिकता पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। शीर्ष अदालत के मुताबिक, जिन परिस्थितियों में इन कानूनों को लागू किया गया था, उनमें अब काफी बदलाव आ चुका है।
प्रजनन दर 3 से घटकर 1.9 हुई
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पिछले दो दशकों में भारत की जनसंख्या संबंधी स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। अदालत ने गौर किया कि देश की कुल प्रजनन दर पहले करीब 3 थी, जो अब घटकर 1.9 रह गई है।
पीठ ने कहा कि जनसंख्या विस्फोट की आशंका के आधार पर बनाए गए दो से अधिक बच्चों वाले प्रतिबंधात्मक कानूनों की मौजूदा परिस्थितियों में प्रासंगिकता पर विचार करना जरूरी है। अदालत ने इन कानूनों की फिर से समीक्षा किए जाने की आवश्यकता जताई।
तीसरे बच्चे के कारण पूर्व सरपंच हुई थीं अयोग्य
यह मामला महाराष्ट्र के काकोडा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव से जुड़ा है। उन्हें तीसरा बच्चा होने के कारण पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मंगला भीमराव को राहत देते हुए उनके खिलाफ महाराष्ट्र के संबंधित कानून के तहत चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी। अदालत के इस कदम को दो से अधिक बच्चों की शर्त से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रफुल्ल तिवारी
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