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जन्माष्टमीः कल घर-घर जन्मेंगे नंदलाल : आधी रात होगा बाल गोपाल जन्मोत्सव, जानिए पूजा मुहूर्त और खास उपाय

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Sep 03, 2026
06:17 AM
आधी रात होगा बाल गोपाल जन्मोत्सव, जानिए पूजा मुहूर्त और खास उपाय

प्रयागराज। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर इस वर्ष भक्तों के बीच उत्साह चरम पर है। पंचांग के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व कल शुक्रवार को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार गृहस्थ और वैष्णव परंपरा के अनुयायी एक ही दिन जन्माष्टमी का व्रत और पूजन करेंगे। धार्मिक मान्यताओं में यह तिथि भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी पर अवतरण से जुड़ी है, इसलिए इसे श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

4 सितंबर को रहेगा जन्माष्टमी का व्रत

ज्योतिषाचार्य पंडित शिप्रा सचदेव के अनुसार इस वर्ष अष्टमी तिथि 3 सितंबर की मध्यरात्रि करीब 2ः30 बजे प्रारंभ होकर 5 सितंबर की रात लगभग 12ः30 बजे तक रहेगी। ऐसे में जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को मनाना उचित रहेगा। इस बार गृहस्थों और साधु-संतों के लिए पर्व की तिथि समान होने से भक्तों में भी असमंजस की स्थिति नहीं रहेगी।

आधी रात में होगा कान्हा का जन्म

जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय मंदिरों और घरों में घंटा-घड़ियाल बजाए जाते हैं। भक्त बाल गोपाल को स्नान कराकर नए वस्त्र और आभूषण पहनाते हैं तथा उन्हें झूले में विराजमान कर जन्मोत्सव मनाते हैं। पूजन के दौरान माखन-मिश्री, पंचामृत और विभिन्न प्रकार के मिष्ठान का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु भगवान कृष्ण की आरती कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

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रात 11ः05 से 12ः35 तक विशेष पूजा

इस वर्ष जन्माष्टमी पर पूजा का विशेष समय रात 11:05 बजे से 12:35 बजे तक बताया गया है। भक्त इस अवधि में विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण का पूजन कर सकते हैं। जन्म के समय भगवान को पंचामृत से स्नान कराने, पीले वस्त्र अर्पित करने और तुलसी दल चढ़ाने की भी परंपरा है।

मनोकामना के लिए चढ़ाएं चांदी की बांसुरी

पंडित शिप्रा सचदेव ने बताया कि भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने और मनोकामना पूर्ति के लिए जन्माष्टमी पर चांदी की बांसुरी अर्पित करना शुभ माना जाता है। जिन घरों में बाल गोपाल विराजमान हैं, वहां उन्हें बांसुरी भेंट की जा सकती है। मंदिर में पूजा करने वाले श्रद्धालु सामान्य बांसुरी भी भगवान के चरणों में अर्पित कर सकते हैं।

मान्यता है कि बांसुरी भगवान कृष्ण के प्रिय वाद्य का प्रतीक है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसे अर्पित करने से भक्त की मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद मिलता है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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