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आगर मालवा: जनसुनवाई में सुनाई पीड़ा : बाबा बैजनाथ मंदिर का ऐतिहासिक 'कमल कुंड' बदहाल,प्रशासन की सुस्ती से ग्रामीणों में आक्रोश

नीरज द्विवेदी

नीरज द्विवेदी

May 20, 2026
06:55 AM
बाबा बैजनाथ मंदिर का ऐतिहासिक 'कमल कुंड' बदहाल,प्रशासन की सुस्ती से ग्रामीणों में आक्रोश

धीरप हाडा,संवाददाता

आगर मालवा। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल बाबा बैजनाथ मंदिर परिसर से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन 'कमल कुंड' इन दिनों घोर प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का शिकार है। कड़कड़ाती धूप और भीषण गर्मी के चलते इस ऐतिहासिक कुंड का पानी न सिर्फ सूखने की कगार पर पहुंच गया है, बल्कि जो पानी बचा है वह भी पूरी तरह दूषित हो चुका है। इस गंदगी और पानी की किल्लत के कारण कुंड में मौजूद सैकड़ों कछुओं और अन्य जलजीवों का जीवन गंभीर संकट में पड़ गया है।

दरअसल, इन दिनों बाबा बैजनाथ मंदिर परिसर के कायाकल्प के लिए बड़े स्तर पर जीर्णोद्धार और नवीन निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। भव्यता की इस रेस में मंदिर के ठीक पीछे स्थित सदियों पुराने ऐतिहासिक कमल कुंड की सुध लेना जिम्मेदार अधिकारी भूल गए। निर्माण कार्यों और देखरेख के अभाव में इस कुंड की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। पानी में ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिर रहा है, जिससे बेजुबान जीव तड़पने को मजबूर हैं।

कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे नागरिक और पुजारी

स्थानीय नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों में इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश है। स्थानीय नागरिक देवेंद्र जोशी और बैजनाथ महादेव मंदिर के पुजारी मुकेश पुरी ने बताया कि कुंड की दुर्दशा को लेकर करीब एक सप्ताह पहले ही जिला मुख्यालय पर आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपी गई थी।

नागरिकों ने प्रशासन से मांग की थी कि मानवीय संवेदनाओं और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम को ध्यान में रखते हुए इन कछुओं को तत्काल प्रभाव से शहर के मोतीसागर तालाब या किसी अन्य सुरक्षित और बड़े जलाशय में विस्थापित (शिफ्ट) किया जाए। मंदिर के पुजारी द्वारा भी इस संबंध में अलग से एक पत्र प्रशासन को दिया गया है, लेकिन हफ्ता बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई ठोस रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं हो सका।

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दम तोड़ सकते हैं बेजुबान, उठ रही कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर इन जीवों को सुरक्षित स्थान पर नहीं भेजा गया या कुंड में साफ पानी की व्यवस्था नहीं की गई, तो दम घुटने और गर्मी के कारण कई बेजुबान कछुओं की मौत हो सकती है। वन्यजीव प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण से जुड़े इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

क्या कहता है जिम्मेदार प्रशासन?

इस पूरे मामले को लेकर जब आगर मालवा के एसडीएम मिलिंद ढोके से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मामला पूरी तरह से प्रशासन के संज्ञान में है।

एसडीएम ढोके के मुताबिक, "कछुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए वन विभाग (Forest Department) के कड़े नियम होते हैं और इसके लिए वैधानिक अनुमति लेना अनिवार्य होता है। वन विभाग को इस संबंध में तत्काल जानकारी दे दी गई है। जब तक आधिकारिक अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक कछुओं की सुरक्षा के लिए पास में ही किसी बड़े जलस्रोत या वैकल्पिक माध्यम से पानी की अस्थाई व्यवस्था की जा रही है ताकि उन्हें राहत मिल सके।"

नीरज द्विवेदी
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नीरज द्विवेदी

5 साल से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव। टीवी और प्रिंट मीडिया में कलमकारी की है। पॉलिटिकल और पब्लिक कनेक्ट की खबरों में दिलचल्पी। TV27NEWS DIGITAL में एंकरिंग भी कर रहे हैं।

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