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रीवा में ग्रामीण का अनोखा विरोध प्रदर्शन : 100वीं बार जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीण ने काटा 'प्रशासन की नाकामी' का केक

नीरज द्विवेदी

नीरज द्विवेदी

May 20, 2026
06:33 AM
100वीं बार जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीण ने काटा 'प्रशासन की नाकामी' का केक

संतोष श्रीवास्तव,संवाददाता रीवा।

मध्य प्रदेश के रीवा जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक बेहद अजीबोगरीब और अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। अमूमन कलेक्ट्रेट परिसर में लोग अपनी समस्याओं को लेकर गुहार लगाते या नारेबाजी करते नजर आते हैं, लेकिन इस बार एक पीड़ित ग्रामीण ने सरकारी सिस्टम की लापरवाही और कछुआ चाल पर तंज कसते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में ही केक काटा। यह केक किसी जश्न का नहीं, बल्कि प्रशासन की 100वीं बार की नाकामी का प्रतीक था।

यह मामला रीवा जिले के ग्राम पंचायत गाढ़ा 138 का है। यहाँ के निवासी दिनेश सोनकर पिछले कई सालों से अपने गाँव की सड़क और पुल निर्माण की मांग को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। पीड़ित दिनेश सोनकर का आरोप है कि साल 2022 में उनके गाँव की सड़क और पुलिया निर्माण के लिए सरकार द्वारा 2 करोड़ 51 लाख 15 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की गई थी।

दिनेश सोनकर ने बताया कि करोड़ों रुपये का बजट पास होने के बावजूद ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की तानाशाही व मनमानी के चलते काम को अधर में लटका दिया गया। पूरे प्रोजेक्ट के नाम पर गाँव में सिर्फ 500 मीटर हिस्से पर मिट्टी डाल दी गई और इसके बाद काम पूरी तरह से बंद कर दिया गया। ग्रामीण का दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उनका आशियाना (घर) भी जमींदोज कर दिया।

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बरसात में होती है आफत

अपनी व्यथा सुनाते हुए पीड़ित ने कहा, "यह मेरी 100वीं जनसुनवाई है। मैं पिछले कई सालों से लगातार हर मंगलवार को कलेक्ट्रेट आ रहा हूँ, लेकिन आज तक मेरी फाइल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अगर आगामी बारिश के मौसम से पहले यह सड़क नहीं बनी, तो गाँव के लोग और मवेशी दलदल और जलभराव के कारण मारे जाएंगे। हमारे गाँव की स्थिति इतनी बदतर है कि आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस तक अंदर नहीं आ पाती है।"

100वीं जनसुनवाई पर काटा 'नाकामी का केक'

लगातार 99 बार आवेदन देने के बाद भी जब सिस्टम के कान पर जूं नहीं रेंगी, तो दिनेश सोनकर इस बार (100वीं बार) अपने साथ एक केक लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद लोगों और मीडिया के सामने उन्होंने सरकारी सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही का विरोध करने के लिए इस केक को काटा। यह अनोखा प्रदर्शन पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में चर्चा का विषय बन गया और वहां मौजूद हर शख्स इस गांधीवादी और तंजिया विरोध को देखता रह गया।

नवागत कलेक्टर ने दिया आश्वासन

इस अनोखे और तीखे विरोध प्रदर्शन के बाद कलेक्ट्रेट महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए रीवा के नवागत कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने पीड़ित दिनेश सोनकर से मुलाकात की, उनका आवेदन स्वीकार किया और पूरे मामले की जांच कराकर सड़क व पुल निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा कराने का ठोस आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि 100वीं बार के इस 'केक कटिंग' विरोध के बाद गाढ़ा 138 गाँव के लोगों को उनके हक की सड़क मिल पाती है या नहीं।


नीरज द्विवेदी
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नीरज द्विवेदी

5 साल से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव। टीवी और प्रिंट मीडिया में कलमकारी की है। पॉलिटिकल और पब्लिक कनेक्ट की खबरों में दिलचल्पी। TV27NEWS DIGITAL में एंकरिंग भी कर रहे हैं।

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