बल्ले के 'वैभव' से विरोधी पस्त : तिलक की स्लेजिंग ने छेड़ी नई बहस

नई दिल्ली। क्रिकेट के मैदान पर उम्र अक्सर अनुभव के आगे छोटी पड़ जाती है, लेकिन वैभव सूर्यवंशी ने इस समीकरण को उलटने का काम शुरू कर दिया है। महज 15 साल की उम्र में बड़े गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ बल्लेबाजी करने वाला यह युवा अब विपक्षी टीमों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। चेन्नई में दलीप ट्रॉफी फाइनल के दौरान वैभव सूर्यवंशी और तिलक वर्मा के बीच हुई तीखी बहस ने भी इसी बदलती तस्वीर की ओर इशारा किया।
‘बच्चा’ से अब विपक्ष की चिंता तक
कुछ समय पहले तक वैभव को क्रिकेट जगत में एक प्रतिभाशाली बच्चे के तौर पर देखा जाता था। लेकिन आईपीएल में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से उन्होंने तेजी से पहचान बनाई और अब घरेलू क्रिकेट में भी सीनियर खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बना रहे हैं। दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में 92 और 40 रन की पारियां खेलने के बाद वैभव ने फाइनल में भी उसी आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की। उनका अंदाज साफ थाकृगेंदबाज कितना भी बड़ा नाम क्यों न हो, वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।
तिलक के तंज से बढ़ा विवाद
फाइनल में ईस्ट जोन की पारी के दौरान वैभव और अभिमन्यु ईश्वरन ने तेजी से रन जुटाए। वैभव ने सीनियर गेंदबाजों के खिलाफ भी आक्रामक रुख बनाए रखा। इसी दौरान साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने उन्हें स्लेज करना शुरू किया। 11वें ओवर में तिलक ने वैभव को लेकर टिप्पणी की और इसके बाद दोनों के बीच बहस बढ़ गई। स्थिति उस समय ज्यादा गर्म हो गई जब तिलक वैभव की ओर बढ़े और उनका हाथ भी आक्रामक मुद्रा में नजर आया। वैभव भी पीछे नहीं हटे। मामला बिगड़ता देख अंपायर को बीच में आकर दोनों खिलाड़ियों को अलग करना पड़ा। यह घटना कुछ ही पलों की थी, लेकिन उसने वैभव की बदलती हैसियत जरूर दिखा दी। अब विपक्ष उन्हें उम्र के आधार पर नजरअंदाज करने को तैयार नहीं है।
सिराज जैसे गेंदबाज के सामने भी बेखौफ
वैभव की सबसे बड़ी ताकत उनका निडर अंदाज है। मोहम्मद सिराज जैसे अनुभवी तेज गेंदबाज के खिलाफ भी उन्होंने मैदान के चारों तरफ शॉट लगाने से परहेज नहीं किया। दलीप ट्रॉफी फाइनल में भी उन्होंने तेज शुरुआत की और 37 गेंदों पर 44 रन बनाए। उनकी पारी में पांच चैके और एक छक्का शामिल रहा।
हालांकि एक बार फिर वह अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। शॉर्ट गेंद पर अतिरिक्त उछाल के कारण उनका बल्ला चूका और टॉप एज के जरिए कैच हो गया। यही वह क्षेत्र है, जहां वैभव को अब अपने आक्रामक खेल के साथ संयम भी जोड़ना होगा।
कामयाबी के साथ बढ़ेगा दबाव
मैदान पर स्लेजिंग क्रिकेट का पुराना हिस्सा है और तिलक की घटना को सीधे किसी व्यक्तिगत विवाद से जोड़ना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि वैभव अब विपक्ष की रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं। अब उनके खिलाफ अलग फील्ड लगेगी, गेंदबाज कमजोरियां तलाशेंगे और मानसिक दबाव बनाने की कोशिश भी होगी। ऐसे में वैभव की असली परीक्षा शुरू हो चुकी है।
अब हर सवाल का जवाब बल्ले से
वैभव के लिए अगला कदम सिर्फ रन बनाना नहीं, बल्कि अपनी शानदार शुरुआत को बड़ी पारियों में बदलना है। 92, 40 और 44 रन की पारियां उनकी प्रतिभा का संकेत हैं, लेकिन अगला पड़ाव शतक और मैच जिताने वाली पारियां होंगी। कल तक सवाल था कि 15 साल के बच्चे को मौका क्यों दिया जाए? अब सवाल बदल चुका हैकृवैभव को रोका कैसे जाए? और यही बदलाव उनकी तेजी से बढ़ती कामयाबी की सबसे बड़ी कहानी है।
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