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CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा : एमपी के 1895 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं,डाइट संस्थानों में 57% लेक्चरर पद खाली,शिक्षण-प्रशिक्षण व्यवस्था कमजोर

नीलम अहिरवार

नीलम अहिरवार

Apr 28, 2026
08:41 AM
एमपी के 1895 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं,डाइट संस्थानों में 57% लेक्चरर पद खाली,शिक्षण-प्रशिक्षण व्यवस्था कमजोर

मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने आई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 1895 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। इनमें 1380 प्राथमिक, 479 मिडिल, 28 सेकेंडरी और 9 हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं।इस खुलासे के बाद शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में शिक्षक तैनाती में भारी असंतुलन है—कहीं जरूरत से ज्यादा शिक्षक, तो कहीं एक भी नहीं।

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CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

  • डाइट संस्थानों में 57% लेक्चरर पद खाली

  • 80% सहायक प्राध्यापक पद खाली

  • शिक्षण-प्रशिक्षण व्यवस्था कमजोर

  • 54 में से सिर्फ 38 ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरे

  • 165.09 करोड़ का प्रावधान, खर्च सिर्फ 35.71 करोड़

  • डिजिटल सिस्टम भी प्रभावी नहीं

  • ग्रामीण-शहरी पोस्टिंग में भारी असमानता

रिपोर्ट ये भी बताती है कि समस्या सिर्फ भर्ती की नहीं, बल्कि पूरे मानव संसाधन प्रबंधन की है। सही जगह सही शिक्षक नहीं पहुंच पा रहे हैं, और प्रशिक्षण व्यवस्था भी कमजोर है। हालात ये हैं कि इन 1895 स्कूलों में छात्र तो मौजूद हैं… लेकिन शिक्षक नहीं। कई जिलों में अधिकारियों ने स्कूलों का निरीक्षण तक नहीं किया। 6 जिलों के बीईओ और 4 जिलों के संकुल प्राचार्यों ने निरीक्षण नहीं किया, जिसके चलते 4 हजार से ज्यादा शिकायतें लंबित पाई गई हैं। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी…और सिस्टम में संतुलन नहीं आएगा…तब तक शिक्षा की ये तस्वीर बदलना मुश्किल ही रहेगा।

CAG रिपोर्ट (अप्रैल 2026) के मुख्य बिंदु:

  • शिक्षकविहीन स्कूल: प्रदेश के 1895 सरकारी स्कूलों में 0 शिक्षक हैं, जिनमें 1379 प्राथमिक और 479 माध्यमिक स्कूल शामिल हैं।

  • प्रशिक्षण में नाकामी: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) में 57% लेक्चरर और 80% सहायक प्राध्यापक के पद खाली हैं, जिससे 54 में से 38 प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे नहीं हो सके।

  • फंड का दुरुपयोग: शिक्षक प्रशिक्षण के लिए 165.09 करोड़ रुपये का प्रावधान था, लेकिन केवल 35.71 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए।

  • अन्य मुद्दे: पिछली रिपोर्टों के अनुसार, श्रम विभाग में कल्याण योजनाओं की राशि का गबन और सरकार द्वारा पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया कर्ज लेने (2023-24 रिपोर्ट) का खुलासा हुआ था

नीलम अहिरवार
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नीलम अहिरवार

17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।

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