मध्यप्रदेश की ‘बाग प्रिंट’ को मिला ग्लोबल प्लेटफॉर्म : पेरिस में होगा प्रदर्शन

भोपाल मध्यप्रदेश की प्रसिद्ध पारंपरिक ‘बाग प्रिंट’ कला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान मजबूत करने जा रही है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मेले फोयर डे पेरिस में इस कला का प्रदर्शन किया जाएगा। यह मेला 30 अप्रैल से 11 मई 2026 तक पोर्टे डे वर्साय एग्जीबिशन सेंटर में आयोजित होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार स्थानीय कला और हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास कर रही है। इसी पहल के तहत ‘बाग प्रिंट’ को इस प्रतिष्ठित मंच तक पहुंचाया जा रहा है।
केन्द्रीय वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय द्वारा देशभर से चुने गए पांच श्रेष्ठ शिल्पकारों में मध्यप्रदेश के नेशनल अवार्डी शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री को शामिल किया गया है, वे इस मेले में मास्टर क्राफ्ट्समैन के रूप में ‘बाग प्रिंट’ कला का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह कला भौगोलिक संकेत (GI) टैग के तहत संरक्षित है।
लाइव डेमो से रूबरू होंगे दर्शक
मेले के दौरान मोहम्मद बिलाल खत्री ‘बाग प्रिंट’ की पारंपरिक तकनीकों का लाइव प्रदर्शन करेंगे। प्राकृतिक रंगों, नक्काशीदार लकड़ी के ब्लॉक्स और हाथ से की जाने वाली प्रिंटिंग प्रक्रिया को दर्शक करीब से देख सकेंगे, इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय हस्तशिल्प की बारीकी और खूबसूरती को समझने का अवसर मिलेगा।
परंपरा और आधुनिकता का संगम
इस प्रदर्शनी के लिए तैयार किए गए डिज़ाइनों में पारंपरिक भारतीय शिल्प के साथ आधुनिक वैश्विक ट्रेंड का समावेश किया गया है। यूरोपीय बाजार को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई ये कलाकृतियां ‘बाग प्रिंट’ को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगी।
‘बाग प्रिंट’ का इतिहास और खासियत
‘बाग प्रिंट’ मध्यप्रदेश के धार जिले के बाग क्षेत्र की पारंपरिक हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग कला है। यह कला लगभग 400 साल पहले सिंध के लरकाना क्षेत्र से आए खत्री समुदाय द्वारा स्थापित की गई मानी जाती है।
इस कला मे सूती और रेशमी कपड़ों पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। लोहे के घोल, धवाड़ी फूल, मायरोबालन, फिटकरी और एलिज़ारिन जैसे तत्वों से रंग तैयार किए जाते हैं। कारीगर लकड़ी के ब्लॉक्स की मदद से कपड़ों पर डिज़ाइन उकेरते हैं, जिन्हें बाद में बहते पानी में धोकर धूप मे सुखाया जाता है, ‘बाग प्रिंट’ की पहचान लाल और काले रंगों में बने ज्यामितीय और पुष्पीय डिज़ाइनों से होती है, जो इसे अन्य प्रिंटिंग शैलियों से अलग बनाते हैं।
आलोक त्रिपाठी
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