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रूस ने भारत के साथ फिर निभाई सच्ची मित्रता : युद्ध के दौर में कच्चे तेल के आयात में हुई ऐतिहासिक बढ़ोतरी, जून में बना नया रिकार्ड

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 02, 2026
05:45 AM
युद्ध के दौर में कच्चे तेल के आयात में हुई ऐतिहासिक बढ़ोतरी, जून में बना नया रिकार्ड

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई थी। ऐसे समय में रूस ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई। इसी का परिणाम है कि जून महीने में भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चे तेल की खरीद की। वस्तु विश्लेषण संस्था केप्लर के ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह किसी भी जून महीने में भारत का अब तक का सबसे अधिक कच्चे तेल का आयात है। इससे साफ हो गया है कि संकट की घड़ी में भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है।

केप्लर के अनुसार, जून में भारत ने प्रतिदिन 49 लाख 30 हजार बैरल कच्चे तेल का आयात किया, जो इस महीने के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। पश्चिम एशिया में आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच भारतीय तेल शोधन कंपनियों ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद की। जून में रूस से आयात बढ़कर 26 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया, जबकि मई में यह लगभग 19 लाख बैरल प्रतिदिन था। यानी केवल एक महीने में रूस से आयात में करीब 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

रूस ने संकट में निभाई भरोसेमंद साथी की भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकट के दौरान रूस ने भारत को ऊर्जा आपूर्ति में किसी तरह की कमी नहीं आने दी। इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंध और मजबूत हुए हैं। केप्लर के शोधन आपूर्ति एवं विश्लेषण प्रमुख सुमित रिटोलिया का कहना है कि रूस से बढ़ी खरीद यह दिखाती है कि भारतीय तेल शोधन कंपनियां अलग-अलग स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने और लागत को संतुलित रखने में सफल रही हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से बढ़ी राहत

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत ने अगस्त तक कच्चे तेल और रसोई गैस की पर्याप्त व्यवस्था कर ली है। एक सरकारी तेल विपणन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा सामान्य होने के बाद खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति फिर शुरू हो गई है। इससे घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता को लेकर बनी चिंताएं काफी हद तक कम हो गई हैं।

भारत ने बढ़ाए खरीद के विकल्प

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय तेल शोधन कंपनियां सामान्यतः एक से दो महीने पहले ही कच्चे तेल की खरीद तय कर लेती हैं। यही कारण है कि अगस्त तक की जरूरतों का बड़ा हिस्सा पहले ही सुनिश्चित किया जा चुका है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भी आपूर्ति की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है। रूस, अफ्रीकी देशों, वेनेजुएला और अन्य उत्पादक देशों से बढ़ते निर्यात के कारण भारत के पास अब पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं।

एक क्षेत्र पर निर्भरता घटाने की रणनीति

भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कच्चे तेल की खरीद का दायरा लगातार बढ़ाया है। अब रूस के अलावा ओमान, ब्राजील, अमेरिका, अंगोला, पश्चिम अफ्रीकी देशों और दक्षिण अमेरिका के कई उत्पादक देशों से भी कच्चा तेल खरीदा जा रहा है। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना और वैश्विक संकट की स्थिति में भी ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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