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संतान सप्तमी पर बन रहे शुभ योग : जानें सूर्योदय, राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त, पूजा का है विशेष महत्व

admin

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Sep 17, 2026
08:00 AM
जानें सूर्योदय, राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त, पूजा का है विशेष महत्व

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, धार्मिक अनुष्ठान, यात्रा या अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से पहले तिथि, नक्षत्र और शुभ-अशुभ समय की जानकारी के लिए पंचांग देखा जाता है। पंचांग के माध्यम से सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन की समय गणना की जाती है।

18 सितंबर 2026, शुक्रवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन संतान सप्तमी का व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।

शुक्रवार को माता संतोषी की पूजा का भी विधान

शुक्रवार का दिन माता संतोषी की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन माता संतोषी की पूजा-अर्चना कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

सूर्योदय और चंद्रोदय का समय

18 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 24 मिनट पर होगा। वहीं चंद्रोदय दोपहर 12 बजकर 42 मिनट और चंद्रास्त रात 11 बजकर 18 मिनट पर होगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेगा।

प्रीति योग के बाद बनेगा आयुष्मान योग

शुक्रवार को प्रीति योग दोपहर 1 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इसके बाद आयुष्मान योग का आरंभ होगा। वहीं दिन का विशेष शुभ समय माने जाने वाला अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 12 बजकर 53 मिनट से 2 बजकर 41 मिनट तक रहेगा।

राहुकाल और अन्य अशुभ समय का रखें ध्यान

इस दिन राहुकाल सुबह 10 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 7 बजकर 48 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक और यमगंड काल दोपहर 3 बजकर 22 मिनट से शाम 4 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन अवधियों में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।

कन्या राशि में सूर्य, धनु में चंद्रमा

18 सितंबर को सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा धनु राशि में स्थित रहेगा। इस दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, दिशाशूल वाले दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा आवश्यक हो, तो परंपरागत ज्योतिषीय उपायों के बाद यात्रा शुरू करने की मान्यता है।

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