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गणपति बप्पा मोरया : देश के इन 4 मंदिरों में दिखता है गणेशोत्सव का सबसे भव्य रंग, लाखों भक्त पहुंचते हैं दर्शन को

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Sep 12, 2026
11:06 AM
देश के इन 4 मंदिरों में दिखता है गणेशोत्सव का सबसे भव्य रंग, लाखों भक्त पहुंचते हैं दर्शन को

भारत में गणेश चतुर्थी 2026 का पावन उत्सव 14 सितंबर यानि सोमवार से शुरु हो रहा है। विघ्नहर्ता गणेश के स्वागत के लिए भक्त आतुर दिखाई दे रहे हैं। वहीं देश के कई प्रसिद्ध गणेश मंदिर भी हैं जहां गणेशोत्सव का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। कहीं भव्य पंडाल सजते हैं तो कहीं प्राचीन मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और महाआरती के जरिए बप्पा का अभिनंदन किया जाता है।

बता दें कि गणेश गणेश चतुर्थी का उत्सव महाराष्ट्र में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, लेकनि अब यह पर्व इसी राज्य तक सीमित नहीं नहीं रह गया है, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में इसकी भव्यता और धार्मिक परंपराएं देखने को मिलती हैं। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूलों से सजे मंदिर, रोशनी की जगमगाहट और चारों ओर गूंजता ‘गणपति बप्पा मोरया’ का जयघोष... गणेश चतुर्थी का पर्व आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं देश के कुछ ऐसे प्रमुख गणेश मंदिरों के बारे में, जहां गणेश चतुर्थी का उत्सव बेहद खास माना जाता है।

सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबईः बप्पा के दर्शन को उमड़ता है सैलाब

मुंबई के प्रभादेवी इलाके में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में शामिल है। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं। विशेष पूजा, मंत्रोच्चार और महाआरती आकर्षण का केंद्र रहते हैं।

मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा की खासियत इसकी दाहिनी ओर मुड़ी सूंड है। चार भुजाओं वाली प्रतिमा में कमल, कुल्हाड़ी, माला और मोदक से भरा पात्र दिखाई देता है। भक्तों के बीच मोदक को बप्पा का प्रिय भोग माना जाता है।

दगडूशेठ गणपति, पुणेः हर साल सजता है भव्य दरबार

पुणे का श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर गणेशोत्सव की भव्यता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां आकर्षक झांकियां और भव्य सजावट की जाती है। इस बार वृंदावन के प्रसिद्ध प्रेम मंदिर की प्रतिकृति आकर्षण का केंद्र बनने वाली है।

इस मंदिर का इतिहास भी बेहद भावनात्मक है। 19वीं सदी में दगडूशेठ और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने बेटे की मृत्यु के बाद भगवान गणेश की आराधना शुरू की थी। आगे चलकर यह स्थान सार्वजनिक गणेशोत्सव की महत्वपूर्ण परंपरा से जुड़ गया।

रणथंभौर गणेश मंदिरः जहां बप्पा के दरबार में लगता है लक्खी मेला

राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित ऐतिहासिक रणथंभौर दुर्ग में मौजूद रणथंभौर गणेश मंदिर गणेश चतुर्थी पर श्रद्धालुओं के लिए खास आस्था का केंद्र बन जाता है। यहां विशाल लक्खी मेले का आयोजन होता है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

यहां भगवान गणेश को त्रिनेत्रधारी स्वरूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि यहां की प्रतिमा स्वयंभू है। खास बात यह भी है कि बप्पा यहां रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ और मूषक के साथ विराजमान हैं।

कनिपकम विनायक मंदिर: बप्पा की प्रतिमा को लेकर अनोखी मान्यता

आंध्र प्रदेश के चित्तूर स्थित कनिपकम विनायक मंदिर में गणेश चतुर्थी से वार्षिक ब्रह्मोत्सव शुरू होता है, जो करीब 20 दिनों तक चलता है। इस दौरान भगवान की उत्सव प्रतिमा को अलग-अलग पारंपरिक वाहनों पर सजाकर भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं।

मंदिर की सबसे अनोखी मान्यता यहां स्थापित स्वयंभू गणेश प्रतिमा को लेकर है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि प्रतिमा का आकार लगातार बढ़ रहा है। मंदिर को आपसी विवादों के समाधान और सत्य की शपथ से भी जोड़ा जाता है, जहां लोग बप्पा को साक्षी मानकर अपने मतभेद दूर करने की कोशिश करते हैं।

गणेश चतुर्थी इन मंदिरों में सिर्फ पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और भव्य उत्सव का ऐसा संगम है, जिसे देखने और महसूस करने के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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