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शहडोल में विकास के दावों की खुली पोल! : शव को घर पहुंचाने बैलगाड़ी बनी सहारा

पलक गीते

पलक गीते

Sep 12, 2026
11:41 AM
शव को घर पहुंचाने बैलगाड़ी बनी सहारा

शहडोल। जिले से एक बार फिर ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने विकास के दावों और जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत चांद और मंगल तक पहुंच चुका है, लेकिन शहडोल के आदिवासी अंचल में आज भी ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। मामला आखेटपुर वार्ड नंबर-1 के डाला टोला का है, जहां सड़क नहीं होने के कारण एक बुजुर्ग महिला के शव को घर तक पहुंचाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को बैलगाड़ी का सहारा लेना पड़ा।

पक्की सड़क नहीं, गांव से एक किलोमीटर पहले रुकी एंबुलेंस

जानकारी के मुताबिक, डाला टोला में पक्की सड़क नहीं होने के कारण शनिवार सुबह शव लेकर पहुंची एंबुलेंस गांव के अंदर तक नहीं जा सकी। एंबुलेंस करीब एक किलोमीटर पहले ही रुक गई। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने शव को बैलगाड़ी पर रखा और कच्चे रास्ते से करीब एक किलोमीटर का सफर तय कर शव को घर तक पहुंचाया।

70 वर्षीय श्याम कली पटेल की इलाज के दौरान मौत

बताया जा रहा है कि डाला टोला निवासी 70 वर्षीय श्याम कली पटेल लंबे समय से बीमार थीं। उनका इलाज स्थानीय अस्पताल के साथ-साथ नागपुर में भी चल रहा था। इलाज के दौरान नागपुर में ही उनकी मौत हो गई। शनिवार सुबह उनका शव एंबुलेंस के जरिए गांव लाया गया, लेकिन खराब सड़क और पक्के मार्ग के अभाव ने परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दीं।

लंबे समय से सड़क की मांग, फिर भी नहीं बदले हालात

ग्रामीणों का कहना है कि डाला टोला में पक्की सड़क बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसके लिए कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आवेदन दिए गए और समस्या से अवगत कराया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार सड़क निर्माण का आश्वासन तो मिला, लेकिन जमीन पर कोई ठोस काम नहीं हुआ।

आम दिनों में परेशानी, आपात स्थिति में बढ़ जाता है संकट

ग्रामीणों के मुताबिक सड़क की बदहाली के कारण रोजमर्रा की आवाजाही में भी काफी परेशानी होती है। लेकिन जब किसी मरीज को अस्पताल ले जाना हो या किसी की मौत के बाद शव को घर तक पहुंचाना हो, तब यही सड़क की समस्या बेहद गंभीर रूप ले लेती है। इस घटना ने गांवों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शहडोल में प्रशासनिक कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

घटना का वीडियो सामने आने के बाद शहडोल में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से समस्या बताए जाने के बावजूद जिम्मेदारों ने सड़क निर्माण की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया। फिलहाल इस मामले में किसी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

तीनों विधानसभा में भाजपा विधायक, फिर भी सड़क का इंतजार

शहडोल जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हैं और संसदीय सीट भी भाजपा के पास है। ऐसे में विपक्ष इस घटना को विकास के दावों से जोड़कर सवाल उठा सकता है कि जब क्षेत्र में सत्ता पक्ष का राजनीतिक प्रतिनिधित्व मजबूत है, तो ग्रामीणों को आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए क्य

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पलक गीते

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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