ब्रिक्स समिट में भारत को मिली बड़ी कूटनीतिक जीत : सुबह 4 बजे तक चली हाईलेवल मीटिंग के बाद संयुक्त बयान पर बनी सहमति, कई मुद्दों पर था पेच

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में शनिवार को 8वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज हो गया है। भारत की अगुवाई में आयोजित हो रहे ब्रिक्स समिट में बड़ी कूटनीतिक सफलता मिल गई है। दरअसल पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सदस्य देशों के बीच मौजूद गंभीर मतभेदों के बावजूद ब्रिक्स देश संयुक्त बयान जारी करने पर सहमत हो गए हैं। इतना ही नहीं, सूत्रों की मानें तो आज ही साझा बयान जारी कर दिया जाएगा। इस सहमति को भारत की कुशल कूटनीति और लगातार संवाद की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
सुबह 4 बजे तक चली बातचीत, कई मुद्दों पर था पेच
सूत्रों के मुताबिक, संयुक्त बयान को लेकर सदस्य देशों के बीच बातचीत देर रात तक चलती रही और करीब सुबह 4 बजे तक विभिन्न मुद्दों पर मंथन हुआ। कई संवेदनशील और विवादित विषयों पर देशों के बीच मतभेद सामने आए, लेकिन भारत ने लगातार बातचीत के जरिए सहमति बनाने की कोशिश जारी रखी। यह बड़ी चुनौती यह थी कि ब्रिक्स में ईरान, सऊदी अरब ओर संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश की एक ही मंच पर मौजूद हैं, जबकि पश्चिम एशिया से जुड़े कई अहम मुद्दों पर उनके रुख अलग-अलग हैं।
भारत ने मतभेदों को नहीं बनने दिया रोड़ा
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच इन देशों को एक साझा बयान पर राजी करना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती थी। भारत ने बातचीत और संवाद के जरिए मतभेदों को ब्रिक्स की सामूहिक कार्यवाही पर हावी नहीं होने दिया। इस प्रयास का नतीजा यह रहा कि सदस्य देश संयुक्त बयान के लिए एक राय पर पहुंच गए। इसे भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
मई की बैठक से लिया सबक, इस बार बनी आम सहमति
इससे पहले मई में नई दिल्ली में हुई ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठक में ईरान और यूएई के बीच मतभेदों के कारण सदस्य देशों के बीच संयुक्त बयान पर सहमति नहीं बन पाई थी। ब्रिक्स के इतिहास में यह पहली बार हुआ था कि बैठक बिना साझा संयुक्त बयान के समाप्त हुई।
उस समय भारत को ‘अध्यक्ष का बयान’ और ‘परिणाम दस्तावेज’ जारी करने पड़े थे। ऐसे में शिखर सम्मेलन में संयुक्त बयान पर सहमति बनना भारत के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘युद्ध नहीं, संवाद से निकलेगा समाधान’ की नीति
भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार यह संदेश देते रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। भारत ने यह भी दोहराया है कि मौजूदा दौर युद्ध का नहीं है और किसी समस्या का स्थायी समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेगा।
जी20 अध्यक्षता की तरह ही ब्रिक्स की अगुवाई में भी भारत ने समूह को किसी पश्चिम-विरोधी मंच के रूप में पेश करने के बजाय ग्लोबल साउथ के हितों, सहयोग और साझा विकास पर जोर दिया है। ऐसे में संयुक्त बयान पर बनी सहमति को भारत की इसी संतुलित कूटनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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