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महाकालेश्वर मंदिर : भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे राजाधिराज, कपाट खुलते ही शिवभक्ति में रंगा परिसर

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 18, 2026
06:06 AM
भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे राजाधिराज, कपाट खुलते ही शिवभक्ति में रंगा परिसर

उज्जैन। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष चतुर्थी के पावन अवसर पर गुरुवार तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। ब्रह्म मुहूर्त में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के कपाट खोले गए। जैसे ही गर्भगृह के द्वार खुले, पूरा मंदिर परिसर शिवभक्ति के रंग में रंग गया।

कपाट खुलने के बाद भगवान महाकाल का हरिओम जल से अभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष पूजन-अर्चन हुआ। पूजा के दौरान भगवान को त्रिशूल, त्रिपुंड, डमरू, भांग, चंदन तथा राम नाम अंकित बेलपत्र अर्पित किए गए। भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का आकर्षक और दिव्य शृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंजा परिसर

भस्म आरती और महाआरती के पश्चात श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन कराए गए। दर्शन शुरू होते ही “जय श्री महाकाल” के उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। घंटियों की मधुर ध्वनि, शंखनाद और वैदिक मंत्रों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक आरती के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

रात से लगी रही भक्तों की लंबी कतार

अपने आराध्य देव के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में पहुंचने लगे थे। सुबह तक दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं में भस्म आरती को लेकर विशेष उत्साह और आस्था देखने को मिली।

विशेष भस्म से होती है आरती

जानकारी के अनुसार प्राचीन काल में भस्म आरती में श्मशान की राख का उपयोग किया जाता था, लेकिन वर्तमान में कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष भस्म अर्पित की जाती है। भस्म आरती में शामिल होने वाले पुरुषों के लिए धोती-सोला तथा महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

देश-विदेश में प्रसिद्ध है महाकाल की भस्म आरती

बाबा महाकाल की भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है। इस दिव्य अनुष्ठान के दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर कई बड़ी हस्तियां भी उज्जैन पहुंचती हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल की विशेष तैनाती की गई। महाकाल की इस अलौकिक आरती ने एक बार फिर श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर कर दिया।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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